गाजा में पत्रकारों की हत्या पर UN रिपोर्ट आई, भारत में फिलिस्तीन दूतावास ने वैश्विक मीडिया से जांच की अपील की
भारत स्थित फिलिस्तीन दूतावास ने UN की उस रिपोर्ट पर ध्यान दिलाया है जिसमें गाजा में पत्रकारों की व्यवस्थित हत्या और मीडिया विनाश का दावा किया गया है।

नई दिल्ली: भारत में फिलिस्तीन दूतावास ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि फिलिस्तीनी पत्रकारों की व्यवस्थित हत्या, मीडिया ढांचे को तबाह करने, सेंसरशिप और सूचनाओं में हेरफेर के जरिए इजरायल ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने युद्ध को आगे बढ़ाया है।
'ट्रुथ अंडर द रबल: मीडिया इन द टाइम ऑफ जेनोसाइड' नाम की यह रिपोर्ट 21 जुलाई 2026 को UN महासभा में पेश की गई थी। इसे फिलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के लिए UN स्पेशल रैपोर्टर फ्रांसेस्का अल्बनेज़ ने सौंपा है। रिपोर्ट में 'मीडियासाइड' शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ गवाहों को खत्म कर और फिलिस्तीनी बयानों को दबाकर पत्रकारिता को पूरी तरह नष्ट करना है।
दूतावास द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से अब तक इजरायली बलों ने करीब 300 फिलिस्तीनी पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को मार डाला है। इसमें 400 से ज्यादा घायल हुए हैं और 100 से अधिक को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 70 पत्रकारों की हत्या उनके पेशेवर काम के बदले में की गई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकारों के करीब 710 रिश्तेदारों की जान गई है और 150 से ज्यादा पत्रकारों के घर तबाह कर दिए गए हैं। मीडिया क्रू पर इजरायली सेना द्वारा सीधी गोलीबारी की 240 घटनाएं दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में अनस अल शरीफ और होसाम शबात जैसे पत्रकारों का जिक्र है, जिन्हें मारे जाने से पहले इजरायली सेना ने सार्वजनिक रूप से आरोपी बताया था।
दस्तावेजों के अनुसार, पत्रकारों और उनके परिवारों को चुप कराने के लिए मनमानी हिरासत, प्रताड़ना, यौन हिंसा और धमकियों का सहारा लिया गया। अक्टूबर 2025 तक गाजा में करीब 150 मीडिया कार्यालय और संस्थान नष्ट हो चुके थे। गाजा के सूचना और संचार बुनियादी ढांचे का 81 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया, जबकि 12 प्रतिशत को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्ट में आरोप है कि इजरायल ने स्वतंत्र विदेशी पत्रकारों के गाजा में प्रवेश को रोक रखा है, केवल सेना के नियंत्रण वाले दौरों की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा, इजरायल में अल जजीरा के कामकाज बंद करने, वेस्ट बैंक ब्यूरो पर छापे और पूर्वी यरूशलेम में फिलिस्तीनी मीडिया पर पाबंदियों का भी जिक्र है।
सेंसरशिप के आंकड़ों पर रिपोर्ट कहती है कि 2024 और 2025 के दौरान 2,388 लेखों के प्रकाशन पर रोक लगाई गई, जबकि 11,239 लेखों को सेंसर किया गया या उनमें बदलाव किए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायली अधिकारियों और मीडिया हस्तियों ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा का समर्थन किया, जो नरसंहार के लिए उकसावे जैसा है।
रिपोर्ट में मेटा, एक्स और गूगल जैसी टेक कंपनियों पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने फिलिस्तीनी कंटेंट को प्रतिबंधित किया और इजरायली विमर्श को बढ़ावा दिया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों पर बिना जांच के इजरायली दावों को दोहराने और फिलिस्तीनी गवाहों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया है।