वेस्ट बैंक में रिहा हुए फिलिस्तीनी कैदियों को दोबारा गिरफ्तार करने का डर

वेस्ट बैंक में रिहा हुए फिलिस्तीनी कैदियों को फिर से गिरफ्तार करने की धमकियां और शारीरिक हमले मिल रहे हैं। PPS ने इसे व्यवस्थित उत्पीड़न बताया है।

Gautam Sahu8 November 20262 min read0 viewsWorld
वेस्ट बैंक में रिहा हुए फिलिस्तीनी कैदियों को दोबारा गिरफ्तार करने का डर

वेस्ट बैंक: कब्जे वाले वेस्ट बैंक में जेल से रिहा हुए पूर्व फिलिस्तीनी कैदियों का उत्पीड़न थम नहीं रहा है। रिहाई के बाद भी इन लोगों को इजरायली बलों द्वारा लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और उन पर शारीरिक हमले किए जा रहे हैं, जिससे उनके बीच दोबारा गिरफ्तार होने का डर बना हुआ है।

फिलिस्तीन प्रिजनर्स सोसाइटी (PPS) के मुताबिक, यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। अधिकारियों द्वारा रिहा किए गए व्यक्तियों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि उन पर हर वक्त निगरानी रखी जा सके और दबाव बनाए रखा जा सके।

इसी कड़ी में पत्रकार हाज़ेम नासिर का मामला सामने आया है। दो साल से अधिक समय तक प्रशासनिक हिरासत में रहने के बाद, रिहाई के महज दो हफ्ते बाद 20 अक्टूबर 2026 को उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। प्रशासनिक हिरासत के तहत इजरायली बल बिना किसी औपचारिक आरोप या मुकदमे के लोगों को जेल में रख सकते हैं।

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हुर्रियत सेंटर फॉर सिविल राइट्स के हेल्मी अल-अराज ने बताया कि ऐसी कार्रवाइयां पूर्व कैदियों को यह संकेत देने के लिए की जाती हैं कि वे हमेशा निगरानी में हैं और उनका पीछा किया जा रहा है, चाहे रिहाई के बाद उनका व्यवहार कैसा भी हो।

कोलोनाइजेशन एंड वॉल रेजिस्टेंस कमीशन (CWRC) ने 7 नवंबर 2026 को जारी आंकड़ों में सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने की बात कही है। आयोग के अनुसार, 1 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 के बीच फिलिस्तीनी किसानों, जैतून के बागों और संपत्तियों पर 674 हमले हुए। इनमें डराने-धमकाने के 249 मामले और 76 शारीरिक हमले दर्ज किए गए हैं।

फिलिस्तीन प्रिजनर्स सोसाइटी की रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर 2023 से अब तक वेस्ट बैंक और यरूशलेम में 26,000 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

मीडिया पेशेवरों की गिरफ्तारी पर कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने भी चिंता जताई है। CPJ की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदा ने पत्रकारों की बढ़ती गिरफ्तारियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और उन्हें चुप कराने का एक अभियान बताया है।

निगरानी करने वालों का तर्क है कि इजरायली बल अक्सर फील्ड पूछताछ का सहारा लेते हैं। इसमें स्थानीय निवासियों को घंटों तक रोककर पूछताछ की जाती है और रिहा करने से पहले उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय आबादी में डर पैदा करना है।

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