'नस्लवाद मानवता के लिए खतरा', फिलिस्तीनी राजदूत अबू शौश ने की एकजुटता की अपील
भारत में फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला एम अबू शौश ने नस्लवाद को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया और धार्मिक सहिष्णुता पर जोर दिया।

नई दिल्ली: भारत में फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला एम अबू शौश ने धार्मिक असहिष्णुता और नफरत के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि नस्लवाद वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए सीधा खतरा बन चुका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए राजदूत ने कहा कि शांतिपूर्ण मानवीय अस्तित्व के लिए आपसी सम्मान और बहुलवाद बुनियादी स्तंभ हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि नस्लवाद मानवता के लिए एक बड़ा खतरा है।
धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी स्वीकार्यता की भूमिका पर जोर देते हुए राजनयिक ने बताया कि सभी धर्मों का सम्मान और दूसरों को स्वीकार करना ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सद्भाव और एक शांत दुनिया की अनिवार्य नींव है।
अबू शौश ने उन लोगों और समूहों की कड़ी आलोचना की जो नफरत फैलाते हैं या धार्मिक प्रथाओं का अपमान करते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी हरकतें बुनियादी सामाजिक ढांचे को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग किसी भी धर्म या विश्वास के लोगों के खिलाफ नफरत भड़काते हैं, उनके विश्वास का मजाक उड़ाते हैं या उनकी धार्मिक परंपराओं का अपमान करते हैं, वे केवल असहिष्णुता नहीं फैला रहे, बल्कि हमारी साझा मानवता की नींव को खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि नस्लवादी हम सभी के लिए खतरा हैं।
इससे पहले गुरुवार को भारत में फिलिस्तीन दूतावास ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि फिलिस्तीनी पत्रकारों की व्यवस्थित हत्या, मीडिया बुनियादी ढांचे के विनाश, सेंसरशिप और दुष्प्रचार ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल के युद्ध को सुविधाजनक बनाया है।
21 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में सौंपी गई इस रिपोर्ट का शीर्षक 'ट्रुथ अंडर द रबल: मीडिया इन द टाइम ऑफ जेनोसाइड' है। इसे 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर फ्रांसेस्का अल्बनेज़ ने पेश किया था। रिपोर्ट में 'मीडियासाइड' शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ गवाहों को खत्म कर, फिलिस्तीनी विवरणों को दबाकर और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के जरिए सूचना हेरफेर करके पत्रकारिता का व्यवस्थित विनाश करना है।
दूतावास द्वारा उद्धृत इस रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक इजरायली बलों ने लगभग 300 फिलिस्तीनी पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को मार डाला है, 400 से अधिक घायल हुए हैं और 100 से ज्यादा को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 70 पत्रकारों की हत्या उनके पेशेवर काम के बदले में की गई।
रिपोर्ट में पत्रकारों के करीब 710 रिश्तेदारों की मौत और 150 से अधिक पत्रकारों के घरों के विनाश का भी विवरण है। इसमें मीडिया क्रू पर इजरायली लाइव गोला-बारूद से किए गए 240 हमलों का जिक्र है। रिपोर्ट में इस बात की भी जांच की गई है कि कैसे फिलिस्तीनी पत्रकारों को बिना किसी ठोस सबूत के सशस्त्र संगठनों के सदस्य के रूप में पेश किया गया। इसमें अनस अल शरीफ और होसाम शबात जैसे पत्रकारों के मामले शामिल हैं, जिन्हें मारे जाने से पहले इजरायली सेना ने सार्वजनिक रूप से आरोपी ठहराया था।
रिपोर्ट में पत्रकारों और उनके परिवारों के खिलाफ मनमानी हिरासत, प्रताड़ना, यौन हिंसा और धमकियों का भी उल्लेख है। आरोप है कि इन तौर-तरीकों का मकसद गवाहों को चुप कराना और उल्लंघनों के दस्तावेजीकरण को रोकना है। अक्टूबर 2025 तक गाजा में लगभग 150 मीडिया कार्यालय और संस्थान नष्ट हो चुके थे। रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा के सूचना और संचार बुनियादी ढांचे का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया है, जबकि 12 प्रतिशत को आंशिक नुकसान पहुंचा है।