वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी किसानों पर बढ़ा जुल्म, 63 साल की महिला ने इसराइली settler की करतूत की उजागर.

कब्जे वाले वेस्ट बैंक के कोबर गांव की रहने वाली 63 साल की बास्सेमा खादर नाम की एक फिलिस्तीनी महिला किसान ने एक इसराइली सेटलर की तरफ से लगातार मिल रही धमकियों और हमलों का बड़ा खुलासा किया है। महिला ने बताया कि 'गजाला' नाम के इस इसराइली सेटलर ने वहां के स्थानीय किसानों को लगातार निशाना बनाया है और उनके काम में रुकावट पैदा कर रहा है। इस घटना की जानकारी सबसे पहले 11 सितंबर 2026 को एक अंग्रेजी मीडिया रिपोर्ट में सामने आई थी, जिसके बाद पूरे इलाके के हालात पर सवाल उठने लगे हैं। वेस्ट बैंक में इन दिनों हालात बहुत ज्यादा खराब हैं और आम किसानों का जीना मुहाल हो गया है।
खेती और किसानों पर लगातार हो रहे हमले
वेस्ट बैंक में खेती से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। फिलिस्तीनी कमीशन फॉर रेजिस्टेंस टू कोनाइजेशन एंड वॉल कंस्ट्रक्शन की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही कुल 11,074 हमले दर्ज किए गए थे। इन सभी मामलों में से अकेले 3,488 घटनाएं ऐसी थीं जो खास तौर पर सेटलर लोगों की तरफ से अंजाम दी गई थीं। इससे साफ पता चलता है कि खेतों में काम करने वाले आम लोगों को किस तरह से परेशान किया जा रहा है और उनका रोजमर्रा का जीवन खतरे में पड़ गया है।
मवेशियों और जैतून के पेड़ों को भारी नुकसान
फिलिस्तीनी अथॉरिटी के कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के दौरान सेटलर लोगों ने कुल 8,000 पालतू मवेशियों को या तो मार डाला है या फिर उन्हें चुराकर ले गए हैं। इन मवेशियों में मुख्य रूप से बकरियां और भेड़ें शामिल थीं, जिनके जरिए गरीब किसान अपना गुजारा करते थे। इसके अलावा, इस हिंसा में करीब 41,000 जैतून के पेड़ों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है, जो वहां के लोगों की मुख्य कमाई का जरिया हुआ करते थे। इन पेड़ों के नष्ट होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी पुष्टि
इन सभी गंभीर मामलों की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) की रिपोर्ट से भी होती है। एजेंसी के अनुसार, साल 2026 के दौरान वहां हर दिन औसतन छह हमले रिकॉर्ड किए गए। इन आंकड़ों को देखते हुए साल 2026 को इस क्षेत्र के इतिहास के सबसे हिंसक सालों में गिना जा रहा है। बास्सेमा खादर जैसे आम किसान इन दिनों बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना कर रहे हैं क्योंकि स्थानीय फिलिस्तीनी समुदायों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और कोई भी उनकी सुध लेने वाला नहीं बचा है।