गाजा के नुसीरात शरणार्थी शिविर के पास इसरायली सेना की गोलीबारी में फलस्तीनी बच्ची की मौत

Praggya Singh sabal19 September 20262 min read19 viewsWorld
गाजा के नुसीरात शरणार्थी शिविर के पास इसरायली सेना की गोलीबारी में फलस्तीनी बच्ची की मौत

गाजा के मध्य क्षेत्र में स्थित नुसीरात शरणार्थी शिविर के पास शुक्रवार, 19 सितंबर 2026 को इसरायली बलों की गोलीबारी में एक फलस्तीनी बच्ची की जान चली गई। इस दुखद घटना से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और स्थानीय लोगों में काफी डर देखा जा रहा है। इस घटना से ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार, 18 सितंबर 2026 की शाम को भी नुसीरात शिविर के उत्तर में इसरायली सैन्य वाहन की गोलीबारी से घायल हुए एक फलस्तीनी व्यक्ति ने दम तोड़ दिया था, जिससे हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।

अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़

नुसीरात में स्थित अल-अवदा मेडिकल कॉम्प्लेक्स में लगातार आ रहे घायलों के कारण चिकित्सा गतिविधियों का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अस्पताल की टीम लगातार चल रहे सैन्य अभियानों में घायल होने वाले लोगों का इलाज करने में जुटी हुई है। शुक्रवार को हुई अलग-अलग घटनाओं में नुसीरात और Bureij शिविरों में दो फलस्तीनी महिलाएं गोली लगने से घायल हो गईं, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है जिसे तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता दी गई। इसके अलावा Bureij और Deir al-Balah के पूर्वी इलाकों में इसरायली गोलीबारी में पांच अन्य लोग घायल हुए, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं। शुक्रवार को ही Bureij के पूर्व में ड्रोन हमले में तीन लोग और Jabalia al-Balad के पूर्व में आर्टिलरी शेलिंग यानी तोपखाने की गोलीबारी से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

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गाजा में संघर्ष का अब तक का कुल आंकड़ा

गाजा स्थित फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस संघर्ष में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 73,821 हो गई है और इस दौरान कुल 174,897 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, 11 अक्टूबर 2025 को घोषित किए गए संघर्षविराम के बाद से अब तक 1,386 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 4,784 लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य के दौरान मलबे के नीचे से अब तक 831 शवों को बाहर निकाला गया है।

राहत कार्यों और इमारतों पर मंडराता खतरा

अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) ने गाजा में जारी भारी तबाही और दवाइयों, ईंधन तथा भारी उपकरणों तक सीमित मानवीय पहुंच को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। राहत दलों ने यह चेतावनी भी दी है कि विस्थापित लोगों को शरण देने वाली 2,000 से अधिक क्षतिग्रस्त इमारतें और मकान ढहने के बेहद करीब हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

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