फ़िलिस्तीनी पत्रकार मुआथ अमरनेह ने इज़राइली जेलों की बताई भयावह हालत, बेन-ग्विर की नीतियों से बिगड़े हालात

फिलिस्तीनी पत्रकार मुआथ अमरनेह ने हाल ही में इजरायली जेलों में अपनी हिरासत के दौरान हुई भयावह स्थितियों का खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि वहाँ की परिस्थितियाँ मानव जीवन के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त हैं. अक्टूबर 2023 से अब तक दो बार जेल जा चुके अमरनेह ने अपनी आपबीती सुनाई है, जिसमें इजरायली जेलों में कैदियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार और बिगड़ती स्वास्थ्य सुविधाओं का वर्णन है. यह स्थिति इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर की नई नीतियों से और भी खराब हुई है, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वे जेल की स्थितियों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं.
अमरनेह को पहली बार 16 अक्टूबर, 2023 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें करीब नौ महीने तक प्रशासनिक हिरासत में रखा गया. 9 जुलाई, 2024 को उनकी रिहाई हुई. इस दौरान उन्होंने बताया कि जेल अधिकारियों ने उनकी पिटाई की और उन्हें डायबिटीज तथा पुराने सिरदर्द के लिए चिकित्सीय इलाज से वंचित रखा गया. उन्हें भीड़भाड़ वाली सेल में फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया गया. इतनी कठिनाइयों के बाद, इजरायली विशेष बलों ने उन्हें 20 अगस्त, 2025 को अधिकृत वेस्ट बैंक से दूसरी बार गिरफ्तार किया. उन्हें चार महीने के आदेश के तहत 9 अप्रैल, 2026 तक हिरासत में रखा गया. अपनी दूसरी हिरासत के दौरान, उन्हें ओफ़र जेल में रखा गया, जहाँ उनका वजन कम से कम 20 किलोग्राम घट गया. उन्हें आँखों का गंभीर संक्रमण भी हुआ, जिसके कारण उनकी कृत्रिम आँख भी खराब हो गई. यह उल्लेखनीय है कि 2019 में विरोध प्रदर्शनों को कवर करते समय उन्हें इजरायली रबर की गोली लगने से अपनी प्राकृतिक बाईं आंख पहले ही खोनी पड़ी थी.
इजरायली जेलों में बिगड़ती स्थितियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर द्वारा स्थापित नीतियों से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वे जेल की स्थितियों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं और उनका लक्ष्य कैदियों को केवल न्यूनतम सुविधाएं प्रदान करना है. 2022 के अंत से, बेन-ग्विर ने परिवारिक मुलाकातों पर प्रतिबंध लगाने, नहाने के समय को सीमित करने और भोजन तथा पानी की आपूर्ति को कम करने जैसी पहल की निगरानी की है. अगस्त 2026 में, मंत्री को एक वीडियो में फिलिस्तीनी महिला कैदियों का सामना करते हुए देखा गया था, जहाँ वे बुनियादी जरूरतों की कमी से संबंधित उनकी शिकायतों को सिरे से खारिज कर रहे थे.
मानवाधिकार संगठनों की चिंताएं
मानवाधिकार संगठनों, जैसे कि बेतसेलेम (B'Tselem), ने भुखमरी, यातना, चिकित्सा उपेक्षा और अपमान के आरोपों का दस्तावेजीकरण किया है. उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया है कि अक्टूबर 2023 से अब तक 100 से अधिक फिलिस्तीनी कैदियों की मौत हो चुकी है. इन रिपोर्टों से जेलों के अंदर की गंभीर स्थिति का पता चलता है, जहाँ कैदियों को मूलभूत मानवीय अधिकारों से भी वंचित रखा जा रहा है.
नए कानून और उनके प्रभाव
इजरायली संसद, नेसेट (Knesset), ने 30 मार्च, 2026 को बेन-ग्विर द्वारा समर्थित एक कानून को मंजूरी दी है, जिसमें मौत का कारण बनने वाले कृत्यों के लिए दोषी ठहराए गए फिलिस्तीनी कैदियों के लिए फांसी द्वारा मौत की सजा अनिवार्य की गई है. इस कानून में सर्वसम्मत न्यायिक अनुमोदन की आवश्यकता को हटा दिया गया है और क्षमादान पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. मानवाधिकार समूह इस कानून को भेदभावपूर्ण उपाय के रूप में देखते हैं. यह कानून फिलिस्तीनी कैदियों के प्रति इजरायल की नीतियों में एक बड़ा बदलाव लाता है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय माना जा रहा है.
रेड क्रॉस की पहल
इस बीच, इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) ने 9 सितंबर, 2026 को इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के साथ मुलाकात की, जिसका उद्देश्य जेल मुलाकातों को फिर से शुरू करने पर चर्चा करना था. ये मुलाकातें लगभग तीन साल से रुकी हुई थीं. हालांकि, आईसीआरसी की टीम को कैदियों तक सीधी पहुंच नहीं मिल पाई, जिससे कैदियों की वास्तविक स्थिति जानने में कठिनाई बनी हुई है. यह बैठक यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इजरायली जेलों की स्थिति को लेकर चिंतित है और कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास कर रहा है.