पनामा नहर पर मंडराया बड़ा संकट, पानी की भारी कमी के कारण जहाजों के आने-जाने पर लग सकती है रोक.

Nura Basta8 September 20262 min read59 viewsWorld
पनामा नहर पर मंडराया बड़ा संकट, पानी की भारी कमी के कारण जहाजों के आने-जाने पर लग सकती है रोक.

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ पनामा नहर के अधिकारियों ने जहाजों के आवागमन पर और अधिक पाबंदियां लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस भयंकर जल संकट की मुख्य वजह अल नीनो मौसम पैटर्न का मजबूत होना है जिसके कारण इलाके में पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई है। पनामा नहर प्राधिकरण यानी PCA की पहली महिला प्रशासक के रूप में 7 सितंबर 2026 को अपना पदभार संभालने वाली Ilya Espino de Marotta ने चेतावनी दी है कि यदि सूखा और जल संकट इसी तरह जारी रहा तो फरवरी या मार्च 2027 तक दैनिक रूप से गुजरने वाले जहाजों की संख्या को घटाकर लगभग 29 तक किया जा सकता है।

पनामा में आपातकाल और घटती सीमाएं

जलवायु से जुड़ी इस गंभीर घटना को देखते हुए पनामा सरकार ने 26 अगस्त 2026 को देश भर में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। अधिकारियों का मानना है कि पिछले चार दशकों में यह सबसे मजबूत अल नीनो साबित हो रहा है जिसका असर समुद्री व्यापार पर सीधा पड़ रहा है। पनामा नहर प्रशासन ने अपनी परिचालन प्रक्रियाओं को पहले ही कड़ा करना शुरू कर दिया है। पिछले महीने 4 सितंबर 2026 को दैनिक पारगमन यानी जहाजों की संख्या को 36 से घटाकर 34 कर दिया गया था और इसके बाद 15 सितंबर 2026 को इसे घटाकर 32 दैनिक आवागमन करने का कार्यक्रम तय किया गया था। जहाजों के लिए अधिकतम ड्राफ्ट सीमा को पहले ही 15.2 मीटर से कम करके 14.6 मीटर कर दिया गया था लेकिन गातुन झील के जल स्तर का नया आंकलन करने के बाद 14.48 मीटर की अगली कटौती को 3 सितंबर से टालकर अब 1 अक्टूबर 2026 के लिए तय किया गया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर और पनामा का महत्व

मौजूदा समय में पनामा नहर का सामरिक और व्यापारिक महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है क्योंकि दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz से होने वाले यातायात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर चल रहे युद्ध के कारण 28 फरवरी 2026 से इस रूट पर जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। हालिया शिपिंग डेटा के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले यातायात में 28 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। युद्ध से पहले जहाँ रोजाना औसतन 130 जहाज गुजरते थे वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 77 प्रतिदिन रह गई है। खबरों के अनुसार ईरान ने इस जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया है और अपनी खुद की टोल व्यवस्था लागू कर दी है जिसके कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरी स्थिति की अधिक जानकारी आधिकारिक स्रोत WAM News पर उपलब्ध कराई गई है।

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