अमेरिका का बड़ा फैसला, H-1B वीज़ा फीस बढ़ाने पर पवन खेड़ा ने जताई चिंता.

Sushma Kumari19 September 20263 min read18 viewsIndia
अमेरिका का बड़ा फैसला, H-1B वीज़ा फीस बढ़ाने पर पवन खेड़ा ने जताई चिंता.

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को अमेरिकी प्रशासन के उस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है जिसमें $100,000 यानी करीब एक लाख डॉलर की भारी-भरकम H-1B वीज़ा फीस को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसी दिन एक आदेश जारी कर इस नियम को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद से भारत से अमेरिका जाने वाले टैलेंट और आईटी सेक्टर से जुड़े लोगों के मन में भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।

भारतीय टैलेंट पर पड़ेगा सीधा असर

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना बयान साझा करते हुए चेतावनी दी है कि इस सख्त नीति से भारत के आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और देश के टैलेंट पूल को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचेगा। इस भारी-भरकम फीस की वजह से अमेरिकी कंपनियां विदेशी नागरिकों को वीज़ा स्पॉन्सर करने से कतराएंगी। ऐसे में भारतीय युवा अमेरिका जाने के बजाय ब्रिटेन, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। यह फैसला न केवल उन लोगों के लिए झटका है जो अमेरिका में अपने करियर का सपना देख रहे हैं, बल्कि उन परिवारों के लिए भी चिंता का विषय है जो अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं।

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अदालत के आदेश के बाद भी फंसा है मामला

दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति के इस आदेश के बावजूद यह नीति फिलहाल लागू नहीं की जा सकती है। मेसाचुसेट्स की एक फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 8 जून 2026 को इस $100,000 वीज़ा फीस नीति को गैरकानूनी टैक्स करार देते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद 24 जुलाई 2026 को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फर्स्ट सर्किट ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी यानी DHS की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया जिसमें निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके चलते USCIS यानी U.S. Citizenship and Immigration Services के पास अभी इस फीस को वसूलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस पूरी कानूनी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक USCIS वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

अन्य शुल्कों में भी की गई है बढ़ोतरी

इस एक लाख डॉलर वाली फीस के विवाद के बीच, DHS ने 9 सितंबर 2026 से एक और नया नियम लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत $4,000 के H-1B और $4,500 के L-1 बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट शुल्क को उन सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है जिनमें 50 या उससे अधिक अमेरिकी कर्मचारी काम करते हैं और आधे से ज्यादा कर्मचारी H-1B या L-1 वीज़ा पर हैं। इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए USCIS फॉर्म्स पेज पर जाया जा सकता है। इसके अलावा, DHS ने कैप-सब्जेक्ट H-1B याचिकाओं के लिए एक और अतिरिक्त $103,265 की फीस का प्रस्ताव रखा है, जो 24 अगस्त 2026 तक केवल एक प्रस्ताव के रूप में विचाराधीन है और इसकी पूरी जानकारी USCIS न्यूज़ रूम पर उपलब्ध है।

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