अमेरिका और ईरान की जंग में खर्च हुए 45 अरब डॉलर, सीनेटरों को पेंटागन ने दी जानकारी.

Nura Basta20 September 20264 min read3 viewsWorld
अमेरिका और ईरान की जंग में खर्च हुए 45 अरब डॉलर, सीनेटरों को पेंटागन ने दी जानकारी.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का वित्तीय बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस को एक अनुमानित रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें बताया गया है कि इस संघर्ष पर अब तक कुल $45.1 billion यानी 45.1 अरब डॉलर का भारी-भरकम खर्च आ चुका है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं, क्योंकि युद्ध का दायरा और खर्चे दोनों ही लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

युद्ध से जुड़े सीधे और अतिरिक्त खर्च

पेंटागन द्वारा अमेरिकी संसद को दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कुल राशि में $43.6 billion यानी 43.6 अरब डॉलर का खर्च 3 सितंबर तक के युद्ध से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, अतिरिक्त ईंधन की खपत के लिए अलग से $1.5 billion यानी 1.5 अरब डॉलर का खर्च भी इसमें शामिल किया गया है। हालांकि, अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह आंकड़ा पूरी तरह से अंतिम नहीं है और इसमें कई अन्य छुपे हुए खर्च शामिल नहीं किए गए हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इस रिपोर्ट के अनुसार, क्षतिग्रस्त हुए अमेरिकी सैन्य अड्डों और इमारतों की मरम्मत पर आने वाला खर्च इस बजट में नहीं जोड़ा गया है। इसके अलावा, अप्रत्यक्ष सैन्य अभियानों के खर्चों का कोई विस्तृत आकलन भी कांग्रेस को नहीं दिया गया है। पेंटागन का यह नया अनुमान, कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) द्वारा 1 अगस्त तक प्रोजेक्ट किए गए $38 billion के आंकड़े से काफी ज्यादा है। वहीं, जुलाई महीने में पेंटागन ने खुद इस खर्च का अनुमान $37.5 billion लगाया था, जो अब काफी बढ़ चुका है।

बजट कार्यालय की चेतावनी और भविष्य का अनुमान

कांग्रेसनल बजट ऑफिस यानी CBO ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रक्षा विभाग से जानकारी न मिलने के कारण इस अनुमान में काफी अनिश्चितता बनी हुई है। CBO के अनुसार, अगर लड़ाई की तीव्रता मई और जून जैसी रहती है, तो संघर्ष का अगला एक महीना करीब $2 billion का अतिरिक्त खर्च लेकर आएगा। यदि हिंसा जुलाई के स्तर पर लौटती है, तो मासिक खर्च बढ़कर $3 billion तक पहुंच सकता है। यदि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और ज्यादा तेज होता है, तो मासिक लागत इससे भी कहीं अधिक हो सकती है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार और महंगाई पर असर

इस सीधे सैन्य संघर्ष का असर केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस के जहाजों के आवागमन में बाधा आई है। इन रुकावटों के कारण कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन जैसी रिफाइंड पेट्रोलियम चीजों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

बजट कार्यालय का अनुमान है कि ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण उपभोक्ता महंगाई पर भारी दबाव पड़ेगा। CBO का अनुमान है कि 2027 की पहली तिमाही में व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक फरवरी 2026 के अनुमान से 0.5 percentage points अधिक रहेगा। वहीं, कोर PCE महंगाई 0.3 percentage points अधिक रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा, साल 2026 की दूसरी तिमाही में जब PCE महंगाई 5.3 per cent थी, तब ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने इसमें 2.3 percentage points का योगदान दिया था।

अतिरिक्त बजट की मांग और सैन्य भंडार में कमी

अमेरिकी प्रशासन ने जून के महीने में $87.6 billion के पूरक Appropriations यानी अतिरिक्त बजट की मांग की थी, जिसमें से $67.1 billion अकेले रक्षा विभाग के लिए मांगे गए थे। CBO के मुताबिक, इस मांग में से $42.3 billion सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष से जुड़े हुए थे। इसके साथ ही, रक्षा विभाग द्वारा मिसाइल-रक्षा इंटरसेप्टर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने के कारण विभाग के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आने वाले कई वर्षों के लिए अमेरिकी सेना के पास इंटरसेप्टर का भंडार काफी कम रह जाएगा, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा अवसर लागत घाटा माना जा रहा है।

वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस संघर्ष के कारण अमेरिकी उधार लेने की लागत यानी ट्रेजरी बिल की दरों पर भी असर पड़ेगा। कूटनीतिक अभियानों और विदेशी सहायता से जुड़े संभावित खर्चों को अभी इस आकलन में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वे पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करते हैं कि भविष्य में इस संघर्ष का परिणाम क्या निकलता है। बहरहाल, पेंटागन की यह नई रिपोर्ट और CNN जैसी मीडिया रिपोर्ट्स इस बात की तस्दीक करती हैं कि यह संघर्ष अमेरिका और दुनिया भर के लिए आर्थिक रूप से बेहद महंगा साबित हो रहा है।

Share:

Comments

Leave a comment