पेशावर के स्कूल में छत गिरने से 34 बच्चों और एक शिक्षक की मौत, लापरवाही के आरोप में स्कूल मालिक गिरफ्तार

पेशावर: शहर के दिर कॉलोनी इलाके में स्थित अल-खैर एजुकेशन सेंटर की छत गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया है। इस दर्दनाक घटना में 34 बच्चों और एक शिक्षक की जान चली गई है। मरने वालों में ज्यादातर बच्चे 6 से 12 साल की उम्र के थे, जबकि सबसे बड़े बच्चे की उम्र 14 साल थी।
हादसे के बाद घायलों को लेडी रीडिंग अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने बताया कि इस घटना में 45 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
पेशावर कैपिटल सिटी पुलिस चीफ मियां सईद ने पुष्टि की है कि स्कूल के मालिक मोहम्मद खान को 15 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने स्कूल के मालिकों, शेयरधारकों और निर्माण ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उन पर घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करने और इमारत की खराब हालत की शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप है।
वहीं स्कूल मालिक मोहम्मद खान ने इस हादसे के लिए हाल की बारिश को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इमारत बुनियादी तौर पर कमजोर थी।
खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार ने इस मामले में कई जांच शुरू की हैं। मुख्य सचिव ने प्रांतीय परिवहन सचिव की अगुवाई में दो सदस्यीय जांच समिति बनाई है, जिसे सात दिनों में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही प्रांतीय प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी अपनी फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है। शिक्षा सचिव इनायतुल्लाह वसीम ने प्राइवेट स्कूल्स रेगुलेटरी अथॉरिटी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सरकार ने अब पूरे प्रांत के सभी निजी स्कूलों की इमारतों की तुरंत जांच करने का आदेश दिया है। जिला समितियों को छत, दीवारों और नींव की सुरक्षा जांच कर तीन दिनों में रिपोर्ट देनी होगी। जिन इमारतों को खतरनाक पाया जाएगा, वहां प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाएगा या उनका इस्तेमाल रोक दिया जाएगा।
गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने मुआवजे का ऐलान करते हुए कहा कि मृतक बच्चों के परिवारों को 10 लाख रुपये और घायलों को 3 लाख रुपये दिए जाएंगे। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस घटना पर दुख जताया है और स्कूलों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
मृतकों का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 16 अक्टूबर को किया गया। इस दौरान परिजनों में भारी गुस्सा देखा गया। उनका दावा है कि उन्होंने स्कूल की सुरक्षा को लेकर पहले भी चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।