पेशावर में स्कूल की छत गिरने से मरे 34 बच्चों और एक शिक्षक की नमाज-ए-जनाजा हुई हजारों लोगों ने दी विदाई

Gautam Sahu16 October 20262 min read0 viewsWorld
पेशावर में स्कूल की छत गिरने से मरे 34 बच्चों और एक शिक्षक की नमाज-ए-जनाजा हुई हजारों लोगों ने दी विदाई

पेशावर: शहर के अल-खैर एजुकेशन सेंटर की छत गिरने से जान गंवाने वाले 35 लोगों की नमाज-ए-जनाजा शुक्रवार को अदा की गई। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

यह दर्दनाक हादसा गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को हुआ था जब दिर कॉलोनी स्थित तीन मंजिला स्कूल की छत अचानक गिर गई। इस हादसे में कम से कम 34 बच्चों की मौत हो गई, जिनमें से ज्यादातर की उम्र 6 से 14 साल के बीच थी। मलबे में दबने से एक शिक्षक की भी जान चली गई।

हादसे में 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इनमें से कई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज लेडी रीडिंग हॉस्पिटल और नसीरुल्लाह खान बाबर मेमोरियल हॉस्पिटल में चल रहा है।

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पेशावर कैपिटल सिटी पुलिस चीफ सईद अहमद ने बताया कि स्कूल का बुनियादी ढांचा कमजोर था और छत पर निर्माण कार्य के कारण ज्यादा वजन बढ़ गया था, जिससे वह गिर गई। पुलिस ने स्कूल के मालिक मोहम्मद खान को गिरफ्तार कर लिया है। मोहम्मद खान का दावा है कि हाल की बारिश की वजह से इमारत कमजोर हुई थी।

बचाव कार्य में रेस्क्यू 1122 और पाकिस्तान सेना के जवानों ने मदद की। खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने इस घटना के बाद पूरे प्रांत के सभी स्कूलों का सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया है और विस्तृत जांच की मांग की है।

प्रांतीय शिक्षा सचिव इनायतुल्ला वसीम ने प्राइवेट स्कूल्स रेगुलेटरी अथॉरिटी से 16 अक्टूबर तक रिपोर्ट मांगी है। वहीं, प्रांतीय मुख्य सचिव ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई है जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। पेशावर के डिप्टी कमिश्नर अफाक वजीर ने भी आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हादसे पर दुख जताया है और स्कूलों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने को कहा है। यूनिसेफ ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और प्रभावित समुदाय को मनोवैज्ञानिक सहायता देने की पेशकश की है।

मृतकों के परिवारों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इमारत की स्थिरता को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

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