ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का बड़ा बयान, कहा हालिया संघर्ष में ईरान की थी निष्क्रियता न कि तटस्थता।

ईरान के राष्ट्रपति Dr. Masoud Pezeshkian ने हाल ही में एक बड़ा बयान देते हुए दुनिया के सामने अपनी बात रखी है। आधिकारिक IRNA News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ने यह साफ किया कि हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने तटस्थता नहीं बल्कि निष्क्रियता दिखाई थी। यह बयान उनके उस संबोधन के ठीक बाद आया है जो उन्होंने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UN General Assembly में दिया था। अपने इस संबोधन के दौरान उन्होंने ईरानी जनता को अमेरिका और इस्रायल की तरफ से आतंकवाद का शिकार बताया और बाहरी ताकतों की तरफ से किए गए कायरतापूर्ण हमलों को इसका मुख्य सबूत करार दिया।
क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष का पिछला इतिहास
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन के ये सारे बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों का माहौल काफी जटिल रहा है। जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ सीधा सैन्य अभियान शुरू हुआ था। इस संघर्ष के दौरान हालात बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे और इसमें ईरान के वरिष्ठ नेतृत्व को भी नुकसान उठाना पड़ा था। इससे पहले जून 2025 में बारह दिवसीय युद्ध यानी Twelve-Day War भी हुआ था, जो इस्रायल के साथ सीधे टकराव का एक सीमित दौर था और बाद में अमेरिका तथा कतर की मध्यदस्थता से वहां युद्धविराम लागू हुआ था। इसके बाद जून 2026 में तेहरान ने अमेरिका के साथ एक सहमति पत्र यानी Memorandum of Understanding को अंतिम रूप दिया था, जिसे राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने बिना किसी समझौते वाला यानी नॉन-कन्सेशनल समझौता बताया था ताकि साल की शुरुआत में शुरू हुई दुश्मनी को खत्म किया जा सके।
सऊदी अरब के साथ संबंधों और समुद्री सुरक्षा पर स्थिति स्पष्ट
व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर बात करते हुए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने 12 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया था कि ईरान का सऊदी अरब के साथ कोई युद्ध नहीं चल रहा है, भले ही इतिहास में पुराने तनाव और बुनियादी ढांचे पर होने वाले उन हमलों का जिक्र होता रहा हो जिन्हें अक्सर ईरान समर्थित प्रॉक्सी से जोड़कर देखा जाता है। राष्ट्रपति लगातार क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी बातचीत की वकालत करते आए हैं। इसके साथ ही, 31 अगस्त 2026 को लarak Island पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद उन्होंने कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान पर दोबारा कोई हमला होता है, तो उसका करारा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, 23 सितंबर 2026 तक ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज यानी Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि वहां हुए एक पोत हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई थी और करीब 20 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा था।