महंगाई और गरीबी की मार से फिलीपींस में भूख की दर 1998 के बाद सबसे ऊपर पहुंची

Gautam Sahu17 October 20262 min read0 viewsWorld
महंगाई और गरीबी की मार से फिलीपींस में भूख की दर 1998 के बाद सबसे ऊपर पहुंची

मनीला: फिलीपींस में गरीबी और बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की थाली से खाना कम होता जा रहा है। सोशल वेदर स्टेशंस (SWS) के एक सर्वे के मुताबिक, देश में भूख की दर बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गई है, जो कि साल 1998 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।

21 से 27 सितंबर 2026 के बीच किए गए इस सर्वे में पाया गया कि यह आंकड़ा 2020 के महामारी लॉकडाउन के दौरान रही 21.1 प्रतिशत की औसत दर से भी ज्यादा है। जून 2026 में भूख की दर 20.3 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गई है। इसमें 16.2 प्रतिशत लोग मध्यम भूख और 6.4 प्रतिशत लोग गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं।

देश में गरीबी का स्तर भी तेजी से बढ़ा है। सितंबर में खुद को गरीब मानने वाले परिवारों की संख्या 55 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि जून में यह 49 प्रतिशत थी। आंकड़ों के अनुसार, अब करीब 168 लाख परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं, जबकि साल की शुरुआत में यह संख्या 136 लाख थी। इसके अलावा, लगभग 133 लाख परिवारों यानी 44 प्रतिशत घरों ने खुद को 'फूड पुअर' बताया है।

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क्षेत्रीय आंकड़ों की बात करें तो मेट्रो मनीला में 27 प्रतिशत, लुज़ोन में 23.6 प्रतिशत, मिंडानाओ में 23.7 प्रतिशत और विसायस में 16 प्रतिशत लोग अनैच्छिक भूख का सामना कर रहे हैं। महंगाई की मार इतनी ज्यादा है कि अप्रैल और सितंबर दोनों महीनों में यह दर 7.2 प्रतिशत पर बनी रही। इससे राष्ट्रीय मासिक गरीबी सीमा बढ़कर 15,000 पेसो और खाद्य गरीबी सीमा 8,000 पेसो हो गई है।

सोशल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट विभाग (DSWD) की सहायक सचिव आइरीन डुमलाओ ने 14 अक्टूबर को कहा कि विभाग इन नतीजों को स्वीकार करता है। उन्होंने बताया कि इस डेटा का इस्तेमाल सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा, जिसमें 'वालांग गुटम प्रोग्राम' का विस्तार और सामुदायिक रसोई की स्थापना शामिल है।

इबोन फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक सोनी अफ्रीका ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अधिकारियों ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया। वहीं, स्ट्रैटबेस ग्रुप के सीईओ विक्टर एंड्रेस मनहित ने कहा कि जनता का भरोसा जीतने के लिए सरकार को बुनियादी सामानों की किफ़ायती दरों को प्राथमिकता देनी होगी।

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