PM Modi और Iranian President Masoud Pezeshkian की नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक, क्षेत्रीय शांति पर हुई चर्चा।

भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। यह मुलाकात 18वें BRICS Summit के दौरान हुई, जिसकी मेजबानी भारत 12 से 13 सितंबर 2026 तक कर रहा है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन की बतौर राष्ट्रपति यह पहली भारत यात्रा है और दो सप्ताह से भी कम समय में दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है, इससे पहले वे 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में मिले थे। इस पूरी बैठक की जानकारी Ministry of External Affairs की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।
क्षेत्रीय शांति और कूटनीति पर जोर
बैच के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, खासकर पश्चिम एशिया के हालिया हालातों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने, नेविगेशन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया, क्योंकि हाल ही में हुए जहाजों पर हमलों से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। केंद्रीय मंत्री Shantanu Thakur द्वारा हवाई अड्डे पर स्वागत किए गए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि इस बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा और वाणिज्यिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने संघर्ष का एक बातचीत के जरिए समाधान चाहता है और वह किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा।
BRICS में आर्थिक लचीलापन और आपसी व्यापार
भारत आने से पहले, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने BRICS के भीतर आर्थिक लचीलापन बढ़ाने की वकालत की थी। उन्होंने व्यापार के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल और प्रमुख बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए $10 billion की शुरुआती पूंजी के साथ एक संयुक्त बीमा कंपनी बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस संबंध में DD News की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने दोनों देशों के बीच साझा सभ्यताओं के संबंधों और मजबूत जन-से-जन संबंधों का जिक्र किया।
रणनीतिक प्राथमिकताएं और ऊर्जा सुरक्षा
इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत की प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और Chabahar Port का विकास शामिल है। दोनों नेताओं ने संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और विभिन्न खाड़ी देशों से जुड़े जटिल क्षेत्रीय तनावों के बीच आपसी हितों को साधने पर विचार-विमर्श किया। खाड़ी देशों में रहने वाले और वहां आने-जाने वाले प्रवासियों के लिए क्षेत्रीय स्थिरता बेहद मायने रखती है, क्योंकि पश्चिम एशिया के घटनाक्रम सीधे तौर पर उनके रोजगार और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। भारत और ईरान के बीच यह संवाद दोनों देशों के साझा विकास और समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।