PM Modi और ईरान के राष्ट्रपति की हुई खास मुलाकात, क्षेत्रीय शांति और ऊर्जा सप्लाई पर हुई चर्चा.

नई दिल्ली में 11 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। पिछले आठ वर्षों में किसी ईरानी राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच के मजबूत होते रिश्तों को दिखाती है। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान मिले थे। इस बैठक में पश्चिम एशिया के हालात और समुद्री सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
क्षेत्रीय शांति और समुद्री सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बैठक के दौरान क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखने की खास जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने खुले समुद्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। फरवरी के आखिरी महीने से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण यह मुद्दा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया हालातों पर अपने विचार साझा किए, जिसमें मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना शामिल था। भारत इस समय फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में काम कर रहे 13 भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तर पर प्रयास कर रहा है। इसके बारे में अधिक जानकारी आप विदेश मंत्रालय की प्रेस रिलीज में देख सकते हैं।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम और व्यापार पर चर्चा
अपनी यात्रा के दौरान, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित किया। उन्होंने सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की बात कही और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा। इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI News रिपोर्ट देख सकते हैं। दोनों नेताओं की इस बातचीत में ईरान के चाबहार प्रोजेक्ट में भारत की रणनीतिक रुचि और हिंद महासागर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए तेहरान के साथ लगातार बातचीत जारी रखने की जरूरत पर भी बात हुई। Gulf देशों और इस क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों के लिए भी यह शांति चर्चा बहुत जरूरी है ताकि ऊर्जा और व्यापार के रास्ते सुरक्षित रहें।