संयुक्त राष्ट्र में उठा PoGB का मुद्दा, मानवाधिकार उल्लंघन के लिए पाकिस्तान पर बोलने की मांग

स्विटज़ेरलैंड के जिनेवा शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता जावेद बेग ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और हिंसा को लेकर अपनी कड़ी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी ANI के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल खोली और बताया कि किस तरह से वहां के स्थानीय लोगों पर अत्याचार किए जा रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान को इन सभी अमानवीय और क्रूर हरकतों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वहां के हालातों की असली सच्चाई पता चल सके।
पाकिस्तान ने 1947 में छीना था यह क्षेत्र
जावेद बेग ने बातचीत के दौरान यह बात जोर देकर कही कि PoGB हमारे महान जम्मू-कश्मीर का ही एक दुर्भाग्यपूर्ण हिस्सा है जिसे 1947 में पाकिस्तान ने जबरन छीन लिया था और तब से उस पर अवैध कब्जा जमा रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की आम जनता पर हो रहे जुल्मों के पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तानी हुकूमत और पाकिस्तानी रेंजर्स का हाथ है। उन्होंने कहा कि इस 63वें सत्र में इस गंभीर मुद्दे को उठाने का मुख्य मकसद यही है कि पूरी दुनिया को पता चले कि पाकिस्तान की स्थापना और उसके सुरक्षा बल किस तरह से वहां के मासूम नागरिकों का दमन कर रहे हैं और वहां शांति का नामोनिशान नहीं बचा है।
बुजुर्ग वकील और अवामी एक्शन कमेटी पर जुल्म
कार्यकर्ता ने स्थानीय लोगों की स्थिति का जिक्र करते हुए अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कमेटी के सदस्य और एक 70 वर्षीय वरिष्ठ वकील एडवोकेट अहसन अली तथा उनके साथियों को बिना किसी जमानत के पूरे तीन महीने तक जेल में बंद रखा गया। उन्होंने जानकारी दी कि यह अवामी एक्शन कमेटी कई सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों का एक समूह है जिसे वहां की जनता अपना असली और सच्चा नेतृत्व मानती है। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार ने इन सभी सदस्यों को देश के कड़े आतंकवाद विरोधी कानून यानी शेड्यूल 4 के तहत जेल में डाल दिया है। उन्होंने इस कानून को ऐसा बताया जिससे इंसान जीते जी नर्क जैसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाता है।
किशोर रेयान अली की हत्या पर जताया रोष
जावेद बेग ने एक बेकसूर किशोर लड़के रेयान अली का मामला भी दुनिया के सामने रखा, जिसे उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा PoGB में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उन्होंने इस कायराना और बर्बर कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की और अंतरराष्ट्रीय मंच से यह संदेश दिया कि पाकिस्तान को इस घटना के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के तमाम सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की कि वे इस मामले का तुरंत संज्ञान लें और वहां के आम नागरिकों पर ढाए जा रहे जुल्मों को रोकने के लिए दबाव बनाएं।
भारत के साथ जुड़ा है PoGB का भविष्य
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोहराया कि PoGB और पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर (PoJK) असल में ग्रेटर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का ही अभिन्न हिस्सा हैं। हालांकि पाकिस्तान ने इस पर अवैध कब्जा कर रखा है, लेकिन आने वाले समय में यह क्षेत्र फिर से भारत के इस हिस्से का हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के दिलों में PoGB के भाइयों और बहनों के लिए हमेशा से एक गहरा जुड़ाव और दर्द रहा है और साल 1947 से लेकर आज तक यहां के लोगों ने हमेशा उनके हक के लिए आवाज उठाई है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर उठाए सवाल
लद्दाख और PoGB के बीच के अंतर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि PoGB दरअसल ग्रेटर लद्दाख का ही एक खूबसूरत हिस्सा है। उन्होंने भारत सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जेड-मोड़ सुरंग जिसे आधिकारिक तौर पर सोनमर्ग सुरंग कहा जाता है और जोजिला सुरंग जैसे बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दूर-दराज के इलाकों को आपस में जोड़ने में मदद मिल रही है। इसके विपरीत, उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि चीन द्वारा बनाए गए इस तथाकथित गलियारे से PoGB के आम लोगों को कोई भी फायदा नहीं पहुंचा है और यह वहां के निवासियों के लिए पूरी तरह से बेकार साबित हुआ है।