PoJK में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई शुरू.

Sushma Kumari20 September 20262 min read20 viewsWorld
PoJK में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई शुरू.

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर यानी PoJK में राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई बहुत ज्यादा तेज हो गई है। प्रशासन ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए 43 लोगों को चौथे शेड्यूल यानी Fourth Schedule में डाल दिया है। यह पूरी कार्रवाई गृह विभाग की तरफ से की गई है और इसमें उन लोगों को निशाना बनाया गया है जो लगातार सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों और आंदोलनों से जुड़े हुए हैं।

चौथे शेड्यूल में शामिल किए गए लोगों पर कड़ी नजर

गृह विभाग की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यह फैसला 3 सितंबर 2026 को लिया गया था, जिसे कैबिनेट की 41वीं बैठक में मंजूरी मिली थी। जिन 43 लोगों के नाम इस लिस्ट में जोड़े गए हैं वे सभी JK-JAAC यानी जम्मू कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के सक्रिय सदस्य या समर्थक बताए जा रहे हैं। इस संगठन को पहले ही आतंकवाद विरोधी कानून की धारा 12 के तहत प्रतिबंधित किया जा चुका है। जिन जिलों के लोगों के नाम इस सूची में शामिल हैं उनमें पूंछ, सुधनोटी, मुजफ्फराबाद, कोटली, बाग और भिंबर के साथ-साथ पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई इलाके भी शामिल हैं। अकेले पूंछ जिले से 15 लोग इस लिस्ट में हैं जबकि सुधनोटी से 6 लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा झेलम, लैया, झांग, टोबा टेक सिंह, वेहारी, बहावलनगर और गुजरात के लोग भी इस सूची का हिस्सा हैं।

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प्रदर्शनकारियों पर बढ़ रहा है प्रशासनिक शिकंजा

चौथे शेड्यूल में नाम आने के बाद इन सभी लोगों की गतिविधियों पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी। इन लोगों को नियमित रूप से पुलिस के सामने हाजिरी देनी होगी, इनकी वित्तीय गतिविधियों की जांच की जाएगी और साथ ही इनके यात्रा तथा पासपोर्ट पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। पिछले तीन महीनों से PoJK के कई इलाकों में लगातार विरोध प्रदर्शन, रैलियां और हड़तें हो रही हैं। लोग अपनी बुनियादी राजनीतिक और आर्थिक मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। इन प्रदर्शनों में व्यापारी, सिविल सोसायटी के लोग, वकील और आम नागरिक बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा महंगाई, खराब बुनियादी सुविधाएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी है।

बातचीत की जगह कानूनी कार्रवाई का रास्ता

प्रशासन की तरफ से राजनीतिक मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने के बजाय लगातार सुरक्षा बलों और प्रशासनिक उपायों का सहारा लिया जा रहा है। अधिकारियों के इस रवैये के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई है। सरकार के इन सख्त कदमों के बावजूद इलाके में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन अब भी जारी हैं। कार्यकर्ता और आम लोग रैलियों और सभाओं के माध्यम से अपनी आवाज उठा रहे हैं। इस पूरी स्थिति से साफ पता चलता है कि इलाके के लोगों की नाराजगी सिर्फ कुछेक मुद्दों तक सीमित नहीं है बल्कि यह वहां के राजनीतिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता से भी जुड़ी हुई एक बड़ी समस्या बन चुकी है।

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