PoJK के लोगों को मिले शासन और मालिकाना हक की जम्मू कश्मीर जॉइंट अवमी एक्शन कमेटी ने की मांग
जम्मू कश्मीर जॉइंट अवमी एक्शन कमेटी ने PoJK के संसाधनों और शासन पर स्थानीय लोगों के पूर्ण अधिकार की मांग की है।

मुजफ्फराबाद (PoJK): जम्मू कश्मीर जॉइंट अवमी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (PoJK) के लोगों के लिए शासन, मालिकाना हक और सर्वोच्च अधिकार की मांग को दोहराया है। कमेटी का कहना है कि इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों, जमीन और राजनीतिक भविष्य का फैसला सिर्फ यहां के स्थानीय लोगों द्वारा किया जाना चाहिए।
कमेटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि मालिकाना हक, शासन और सर्वोच्च अधिकार PoJK के लोगों के मौलिक और अटूट अधिकार हैं। उन्होंने मांग की है कि ये अधिकार बिना किसी शर्त के क्षेत्र के निवासियों को सौंपे जाएं।
पोस्ट के मुताबिक, PoJK के लोगों का अपने संसाधनों, जमीन, प्राकृतिक संपदा और राजनीतिक फैसलों पर विशेष अधिकार होना चाहिए। कमेटी ने जोर दिया कि यह संघर्ष केवल संसाधनों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्णय, आत्म-सम्मान और अपने भविष्य का फैसला करने के अधिकार की लड़ाई है।
इस दौरान 'राइट ऑफ ओनरशिप और राइट ऑफ गवर्नेंस' कॉन्फ्रेंस में कामरान बेग ने एक चर्चा पेश की। JKJAAC के अनुसार, बेग ने लोगों के अधिकारों के आंदोलन, PoJK की मौजूदा स्थिति और वहां के निवासियों के राजनीतिक व आर्थिक अधिकारों पर ऐतिहासिक तथ्यों और तर्कों के साथ बात रखी।
कमेटी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र के संसाधनों पर पहला हक PoJK के लोगों का है और उनके भविष्य से जुड़े फैसले उन्हीं के हाथ में होने चाहिए।
इससे पहले जम्मू कश्मीर जॉइंट अवमी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया था कि वह PoJK में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसी स्थितियां पैदा कर रही है। कैसर खान के हवाले से एक पोस्ट में सवाल उठाया गया था कि क्या सरकार के कदम लोगों को उग्रवाद की ओर धकेल रहे हैं।