PoJK मानवाधिकार परिषद ने इमान मज़ारी और Hadi Ali Chattha की दोबारा गिरफ्तारी पर जताई गहरी चिंता

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार परिषद यानी HRC-PoJK ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर बड़ा सवाल उठाया है। संगठन ने इमान मज़ारी और Hadi Ali Chattha को एक और मामले में फिर से गिरफ्तार किए जाने पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह पूरी घटना उस समय सामने आई जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का सीधा आदेश दिया था। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से इलाके में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और लोग इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया के जरिए सरकार से मांगा गया स्पष्टीकरण
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में मानवाधिकार परिषद ने सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की है। परिषद ने मांग की है कि इस दोबारा गिरफ्तारी के पीछे की वजहों को लेकर जनता और कानूनविदों के सामने एक स्पष्ट और औपचारिक कानूनी विवरण रखा जाना चाहिए। परिषद का साफ कहना है कि किसी भी नागरिक के खिलाफ जांच करने और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का अधिकार राज्य के पास पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के ठीक बाद यह कदम उठाया गया, उससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं और इस पर से पर्दा उठना बेहद जरूरी हो गया है।
एंटी-टेररिस्ट कोर्ट में पेशी और न्यायिक हिरासत
परिषद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इन दोनों चर्चित चेहरों को गिरफ्तारी के बाद तुरंत बाद एक एंटी-टेररिस्ट कोर्ट के सामने पेश किया गया था। इस दौरान पुलिस ने अदालत से उनकी 30 दिन की फिजिकल रिमांड देने की विशेष मांग की थी। हालांकि अदालत ने पुलिस की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया और दोनों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जेल भेज दिया। इस मामले में अब न्यायिक हिरासत के तहत आगे की सुनवाई की जाएगी। परिषद ने इस बात पर जोर दिया है कि देश में चाहे कोई भी मामला हो, हर नागरिक को कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अधिकार मिलना ही चाहिए।
कानून के शासन और निष्पक्ष सुनवाई पर जोर
मानवाधिकार परिषद ने अपने बयान में इस बात को बहुत प्रमुखता से उठाया है कि किसी भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में अदालती आदेशों का सम्मान करना सबसे पहला कर्तव्य होता है। कानून का समान रूप से लागू होना और आरोपी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने के लिए निष्पक्ष मौका मिलना एक स्वस्थ समाज की बुनियादी शर्तें हैं। परिषद ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी शौक नवाज मीर की कस्टडी को लेकर विरोधाभासी बातें सामने आई थीं, जिस पर संगठन ने तत्काल और पारदर्शी स्पष्टीकरण की मांग की थी। अब एक बार फिर से कानून के जानकारों और आम लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन गिरफ्तारियों के पीछे का ठोस कानूनी आधार जनता के सामने कैसे रखता है।