UNHRC में उठा PoJK की अशांति और हत्याओं का मुद्दा

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के हालात को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के चल रहे 63वें सत्र के दौरान PoJK में हुई हिंसा, नागरिक हत्याओं और मानवाधिकारों के हनन का गंभीर मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया है। स्थानीय लोगों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
जिनेवा में गूंजी PoJK की आवाज
जम्मू कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (JKPNP) के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सचिव हबीब उर रहमान ने जिनेवा सत्र के दौरान इस गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पिछले सौ दिनों से अधिक समय से स्थानीय लोग बुनियादी सुविधाओं और नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर हैं।
-
प्रमुख मांगें और मुद्दे:
- बिजली और अन्य यूटिलिटी बिलों के खिलाफ प्रदर्शन
- बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा
- प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और सुशासन
दमनकारी नीतियों और बल प्रयोग के आरोप
रहमान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया है। युवा प्रदर्शनकारियों को पीटा गया, जेलों में डाला गया, यात्रा प्रतिबंध लगाए गए और उनके पहचान पत्र तक रद्द कर दिए गए। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया गया है जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
शव रोके जाने और भारी जनहानि के दावे
प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस अशांति में कई युवा और बच्चे भी प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सुरक्षा बलों द्वारा शवों को परिजनों को न सौंपे जाने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की गुहार
JKPNP के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे इस मामले का संज्ञान लें। एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के प्रतिनिधियों द्वारा भी इस पर चिंता जताई जा चुकी है। अब देखना यह होगा कि वैश्विक मंचों पर उठाई गई इन आवाजों का PoJK के हालातों पर क्या असर पड़ता है।