सऊदी अरब के प्रिंस तुर्की अल-फaisal ने ईरान और इसराइल पर साधा निशाना, मध्य पूर्व संकट की बताई असली वजह.

मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और संकट के बीच सऊदी अरब से एक बहुत बड़ा बयान सामने आया है। 20 सितंबर 2026 को किंग फैसल सेंटर फॉर रिसर्च एंड इस्लामिक स्टडीज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन प्रिंस तुर्की अल-फसल ने क्षेत्र के हालात पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पिछले बीस सालों में क्षेत्रीय व्यवस्था के पूरी तरह से ढह जाने की वजह से ही आज यह भयानक संकट पैदा हुआ है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर ईरान और इसराइल की नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं।
बीजिंग में दिया गया महत्वपूर्ण भाषण
यह पूरा मामला 13वें बीजिंग शियांगशान फोरम का है जो चीन की राजधानी बीजिंग में 15 सितंबर से 17 सितंबर 2026 के बीच आयोजित किया गया था। इस बड़े मंच पर बोलते हुए प्रिंस तुर्की ने स्पष्ट रूप से बताया कि इस पूरे संघर्ष की जड़ें इस बात में छिपी हैं कि ईरान और इसराइल दोनों ही अपने आस-पास के इलाकों पर अपना वर्चस्व और अधिकार जमाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक इन दोनों देशों की महत्वकांक्षाओं की वजह से पूरा क्षेत्र लगातार अशांति और युद्ध के साए में जी रहा है जिससे आम लोगों का जीवन बहुत अधिक प्रभावित हो रहा है.
प्रिंस तुर्की ने क्षेत्रीय अस्थिरता के कई मुख्य कारणों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ किसी तरह के स्थायी समझौते करने में असफल रहा है। इसके साथ ही ईरान अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए प्रॉक्सी समूहों यानी की छद्म संगठनों का इस्तेमाल करता है। लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूती विद्रोहियों का समर्थन करना इसी रणनीति का हिस्सा है जो पूरे क्षेत्र की शांति को लगातार खतरे में डालता है। इसके अलावा उन्होंने इसराइल की सैन्य और राजनीतिक कार्रवाइयों को भी इस संघर्ष को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जिसके परिणाम स्वरूप पूरी दुनिया को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
वैश्विक स्तर पर पड़ रहा है बुरा असर
इन देशों की आपसी खींचतान और लड़ाइयों का असर केवल मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। प्रिंस ने अपने संबोधन में बताया कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा यानी की तेल और गैस की सप्लाई में भारी रुकावटें आ रही हैं। इसके साथ ही खेती किसानी के लिए बेहद जरूरी खाद और उर्वरकों की आपूर्ति भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। दुनिया भर के आम नागरिकों को इसके कारण महंगाई और अन्य आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जो चिंता का विषय है.
चीन और सऊदी अरब की साझेदारी पर जोर
अपने इस भाषण के दौरान प्रिंस तुर्की अल-फसल ने एक बड़ा प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने चीन से अपील की कि वह सऊदी अरब के साथ मिलकर ईरान और इसराइल पर दबाव बनाने का काम करे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने पड़ोसियों की संप्रभुता का पूरा सम्मान करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए एक सामान्य और पारंपरिक देश की तरह बर्ताव करना चाहिए। उनके इन विचारों को 20 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मुख्य रूप से SaudiNews50 अकाउंट के जरिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर शेयर किया गया, जिसके बाद से इस पर लगातार चर्चा हो रही है.