यमन संकट: प्रिंस तुर्की अल-फयसल ने हूती बलों को बताया 'बेरहम गैंग'

यमन में जारी संघर्ष और सऊदी अरब की भूमिका को लेकर प्रिंस तुर्की अल-फयसल ने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया कि सऊदी अरब का हस्तक्षेप केवल स्थिरता लाने और क्षेत्र में शांति बहाल करने के उद्देश्य से था। प्रिंस तुर्की ने कहा कि सऊदी नेतृत्व की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे जो कहते हैं, वही करते हैं और उनका पूरा ध्यान हमेशा स्थिरता बनाए रखने पर रहता है।
प्रिंस तुर्की ने यमन को हूती बलों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए शुरू किए गए सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि जब हालात एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गए थे, तब यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। उन्होंने इन सैन्य कार्रवाइयों को एक ऐसी जीत की ओर बढ़ता कदम बताया, जिसका मकसद क्षेत्र के उन अधिकारों को वापस दिलाना है जो लंबे समय से छीने गए थे।
हूती विद्रोहियों पर तीखा हमला
हूती बलों की कार्यशैली पर प्रहार करते हुए प्रिंस तुर्की अल-फयसल ने उन्हें एक ऐसा 'गैंग' करार दिया, जिसमें न तो दया है और न ही करुणा। उन्होंने कहा कि इन विद्रोहियों को यमनी जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। प्रिंस ने जोर देकर कहा कि सऊदी नेतृत्व ने अपनी क्षमताओं के दम पर स्वतंत्र रूप से काम किया ताकि हमलावरों को रोका जा सके और उन लोगों की मदद की जा सके जो वास्तव में शांति चाहते हैं।
अपने बयान के अंत में प्रिंस तुर्की ने सऊदी अरब की भूमिका को परिभाषित करते हुए कहा कि उनका देश उन लोगों के लिए 'तलवार' के समान है जो आक्रमण करते हैं, और उन लोगों के लिए एक 'ढाल' है जो सुरक्षा और शरण की तलाश में हैं।