यमन में प्रोजेक्ट मसाम ने एक हफ्ते में 1,291 विस्फोटक हटाए, सड़कों और स्कूलों को मिली राहत

Nura Basta12 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन में प्रोजेक्ट मसाम ने एक हफ्ते में 1,291 विस्फोटक हटाए, सड़कों और स्कूलों को मिली राहत

यमन: सऊदी अरब के किंग सलमान ह्यूमैनिटेरियन एड एंड रिलीफ सेंटर (KSRelief) की विशेष डीमाइनिंग पहल, यानी प्रोजेक्ट मसाम, ने यमन में 3 से 9 अक्टूबर 2026 के बीच एक ही हफ्ते में 1,291 विस्फोटक उपकरण साफ़ कर दिए। यमन के कई हिस्सों में बिछे और पड़े इन खतरनाक उपकरणों को हटाने से आम लोगों की ज़िंदगी पर मंडराता खतरा काफी हद तक कम हुआ है।

आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस दौरान साफ़ किए गए विस्फोटकों में सबसे बड़ी संख्या अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस (UXO) की रही, यानी ऐसे गोले और बम जो फटे बिना ज़मीन में पड़े रह गए थे। इनकी कुल संख्या 1,253 रही। इसके अलावा 26 एंटी-टैंक माइन, 10 एंटी-पर्सनल माइन और दो इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) भी हटाए गए।

किन इलाकों में चला अभियान

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

यह अभियान यमन के कई राज्यों में फैला रहा। इसमें अबयान, अदन, अल-ढाले, हज़रमौत, हज्जा, लहज, मारिब, शबवा और ताइज़ शामिल हैं। इन सभी जगहों पर टीमों ने मिलकर कुल 2,09,755 वर्ग मीटर ज़मीन की जांच और सफ़ाई की। सिर्फ़ एक हफ्ते में इतने बड़े इलाके को सुरक्षित करना इस मिशन की रफ़्तार और तैयारी दोनों को दिखाता है।

इस हफ्ते की उपलब्धि को जोड़ें तो प्रोजेक्ट मसाम ने जुलाई 2018 में अपनी शुरुआत से अब तक कुल 5,96,036 सुरंगें और विस्फोटक खतरे साफ़ कर दिए हैं। यानी यह लंबे समय से चल रहा ऐसा काम है जिसमें हर हफ्ते नई जगहों से खतरा हटाया जाता रहा है।

प्रोजेक्ट मसाम के मैनेजिंग डायरेक्टर ओसामा अलगोसैबी ने पुष्टि की है कि यह परियोजना तय समय-सारणी के मुताबिक़ चल रही है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय माइन एक्शन स्टैंडर्ड्स (IMAS) का पालन किया जा रहा है, ताकि यमन के नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। साथ ही स्पेशल टास्क और रैपिड रिस्पॉन्स टीमें आज़ाद कराए गए इलाकों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

इस काम का असर सिर्फ़ ज़मीन साफ़ होने तक सीमित नहीं है। सड़कों, गांवों और स्कूलों से खतरनाक सामग्री हटने से लोग बिना डर आवाजाही कर सकते हैं और मानवीय सहायता सामान तक तेज़ी से पहुंच सकती है। यमन में वर्षों के संघर्ष के बाद ऐसे कदम रोज़मर्रा की ज़िंदगी को पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment