सुशासन के बिना दो-तिहाई बहुमत भी राजनीतिक स्थिरता नहीं दे सकता: पूर्व PM सुशीला कार्की

पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने हाल ही में देश में राजनीतिक स्थिरता और सुशासन पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसने हर वर्ग को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने बड़े ही साफ शब्दों में कहा है कि अगर किसी सरकार के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत भी हो, लेकिन वह सुशासन देने में नाकाम रहती है, तो यह बहुमत भी राजनीतिक स्थिरता की गारंटी नहीं दे सकता। यह बयान जेन-जी आंदोलन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर दिया गया है, जो इस बात पर जोर देता है कि जनता की आवाज और उनकी अपेक्षाएं कितनी मायने रखती हैं।
मंगलवार को उन्होंने फेसबुक के जरिए अपना संदेश जारी करते हुए कहा कि राजनीतिक स्थिरता सिर्फ संसद के संख्या बल से तय नहीं होती, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों के चरित्र और उनके काम करने के तरीके से तय होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह प्रभावी तरीके से सुशासन को सुनिश्चित करे, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए, कानून के राज को कायम रखे और देश के नागरिकों के अधिकारों का पूरा सम्मान करे। उनका मानना है कि जनता को बुनियादी सुविधाएं और न्याय देना ही किसी भी सरकार का पहला कर्तव्य होता है।
जेन-जी आंदोलन: युवा की आवाज़ और उसके परिणाम
कार्की ने जेन-जी आंदोलन के दौरान हुए नुकसान और उससे पैदा हुए दर्द को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में कई लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा और बड़ी संख्या में युवा घायल हुए। उन्होंने सभी राजनीतिक शक्तियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार और सतर्क रहें। कार्की ने 8 सितंबर, 2025 को इस आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि दी और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने सबको एक साथ मिलकर इस मुश्किल घड़ी का सामना करने, एक-दूसरे का साथ देने और अपने दुख को कम करने के लिए करुणा का भाव रखने को कहा।
पूर्व प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि युवाओं ने सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों और डिजिटल मंचों का सहारा लिया था। वे एक बेहतर भविष्य की उम्मीद में आंदोलन कर रहे थे। लेकिन दुर्भाग्य से, उनकी आवाज को दबाने की कोशिशों में कई मासूम युवाओं की जान चली गई और बहुत से लोग घायल हुए। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन के दौरान निजी और सरकारी संपत्ति के साथ-साथ देश की राष्ट्रीय विरासत स्थलों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। ये घाव काफी गहरे हैं और इन्हें भरने में समय लगेगा।
भविष्य के लिए चेतावनी और अपील
सुशीला कार्की ने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियां पूरी ईमानदारी, जवाबदेही और सतर्कता के साथ निभानी चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि लोगों को फिर से सुशासन और बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने की जरूरत न पड़े। उन्होंने दुख जताया कि जेन-जी आंदोलन में हुए भारी जन-धन के नुकसान को एक साल पूरा होने से पहले ही देश एक बार फिर एक दुखद स्थिति का सामना कर रहा है। हाल ही में आई भोटेकोशी बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने सभी से अपील की कि आपदा की इस घड़ी में धैर्य बनाए रखें, जिम्मेदारी से काम करें और एकजुटता के साथ एक-दूसरे का सहयोग करें। उनका संदेश है कि मुश्किल समय में ही समाज की असली ताकत सामने आती है और हमें साथ मिलकर हर चुनौती का सामना करना चाहिए।