पुतिन और पेज़ेशकियन की तुर्कमेनिस्तान में मुलाकात, मध्य पूर्व संकट पर बनी रणनीति

Gautam Sahu9 October 20262 min read0 viewsWorld
पुतिन और पेज़ेशकियन की तुर्कमेनिस्तान में मुलाकात, मध्य पूर्व संकट पर बनी रणनीति

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने तुर्कमेनिस्तान के तुर्कमेनबाशी में एक महत्वपूर्ण बैठक की। 8 अक्टूबर, 2026 को हुई इस मुलाकात का मुख्य केंद्र मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना रहा। यह बैठक अवाज़ा में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें सीआईएस (CIS) शिखर सम्मेलन और कैस्पियन पर्यावरण शिखर सम्मेलन जैसे अहम कार्यक्रम शामिल थे।

बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने मध्य पूर्व के संकट को सुलझाने में रूस की पूरी मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने इस बात की सराहना की कि ईरान शांति बहाली के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। पुतिन ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों पर भी जोर दिया और बताया कि 2025 में द्विपक्षीय व्यापार में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका सकारात्मक असर 2026 के शुरुआती सात महीनों में भी देखा गया है। यह मजबूत साझेदारी जनवरी 2025 में हस्ताक्षरित व्यापक रणनीतिक समझौते पर आधारित है।

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की नई उम्मीदें

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राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक अंतिम ढांचे पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने खुलासा किया कि अमेरिका के साथ नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संघर्ष को खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। पेज़ेशकियन ने कहा कि ये प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए संशोधित किए जा रहे हैं और किसी भी प्रगति के लिए आपसी सम्मान और धमकी मुक्त माहौल जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में रूस के समर्थन के लिए पुतिन का आभार जताया, जिससे तेहरान के खिलाफ नए एकतरफा कदमों को रोकने में मदद मिली।

दिलचस्प बात यह है कि इस मुलाकात के ठीक बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक चर्चा हो रही है। ट्रंप ने यह भी आश्वासन दिया कि वह 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेंगे।

इन राजनीतिक चर्चाओं के अलावा, सीआईएस शिखर सम्मेलन में आईटी सहयोग और मानवीय पहलों पर भी बात हुई। साथ ही, रूस, ईरान, कजाकिस्तान, अजरबैजान और तुर्कमेनिस्तान जैसे कैस्पियन तटवर्ती देशों ने समुद्र के गिरते जल स्तर और जैविक संसाधनों के संरक्षण जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर अपनी चिंताएं साझा कीं।

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