कतर और चीन ने मिलाया हाथ, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने की बड़ी कोशिश.

Praggya Singh sabal8 September 20263 min read34 viewsQatar
कतर और चीन ने मिलाया हाथ, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने की बड़ी कोशिश.

खाड़ी देशों में चल रही तनाव की स्थिति के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू कराने के लिए लगातार काम कर रहा है। इस अहम कोशिश में कतर के साथ कई वैश्विक और क्षेत्रीय साझेदार देश भी शामिल हैं, जिनमें चीन का नाम सबसे ऊपर है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति बहाल करना और दोनों देशों के बीच जारी तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाना है।

बीजिंग में हुई उच्च स्तर की बैठक

इस पूरी योजना को आगे बढ़ाने के लिए, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलrahman बिन جاسم अल थानी ने बीजिंग का दौरा किया। वहां उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा और पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना था। खाड़ी देशों में लगातार बढ़ रही सैन्य हलचल के बीच यह मुलाकात बहुत मायने रखती है, क्योंकि इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।

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सैन्य तनाव और कतर का कड़ा रुख

एक तरफ जहां बातचीत के रास्ते तलाशे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर सैन्य तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी 8 सितंबर को ईरान की तरफ से यह रिपोर्ट सामने आई कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक मानवरहित अमेरिकी जहाज पर हमला किया। इसके जवाब में अमेरिकी बलों ने ईरान के कई ड्रोन गिरा दिए और एक ग्राउंड कंट्रोल साइट पर भी हमले किए। इन सब के बीच कतर ने अपनी तटस्थता की नीति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। कतर सरकार ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देगी।

तनाव कम करने के लिए कतर की लगातार कोशिशें

कतर की मध्यस्थता की रणनीति पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जारी है। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने संघर्ष को चरणबद्ध तरीके से कम करने यानी phased de-escalation की वकालत की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय आपसी आर्थिक आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, कतर के प्रधानमंत्री ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया था और वहां के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से सीधी बातचीत की थी, जिसमें एक अस्थायी सुरक्षित गलियारे यानी safe passage corridor के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी।

बातचीत की पुरानी कोशिशों में आई थी रुकावटें

इससे पहले भी इस संकट को हल करने के कई प्रयास किए गए थे, लेकिन उन्हें भारी असफलताओं का सामना करना पड़ा था। जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में दोहा में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष तकनीकी बातचीत हुई थी, जो होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के जमे हुए फंड को जारी करने जैसे मुद्दों पर किसी दीर्घकालिक समझौते पर नहीं पहुंच सकी थी। जून 2026 में एक 14 सूत्रीय अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसका मकसद संघर्ष को रोकना और जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना था। लेकिन दोनों तरफ से एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगने के बाद वह समझौता भी टूट गया था। इन तमाम असफलताओं और बाधाओं के बावजूद कतर दोनों पक्षों के साथ रोजाना बातचीत कर रहा है और इस तनाव के चक्र को खत्म करके फिर से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील कर रहा है।

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