मदीना में पावर स्टेशन पर हमले की कतर ने की कड़ी निंदा

मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है, जब सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में एक पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन को निशाना बनाया गया। इस कायरतापूर्ण हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। कतर ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता जताई है।
कतर का कड़ा रुख और क्षेत्रीय सुरक्षा
कतर के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर इस घटना को अस्वीकार्य बताया है। मंत्रालय का कहना है कि यह हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह इस्लामिक पवित्र स्थलों की गरिमा और सुरक्षा पर भी सीधा प्रहार है। कतर ने जोर देकर कहा है कि सऊदी अरब की सुरक्षा और अखंडता पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
हमले की पूरी पृष्ठभूमि
यह घटना मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को सुबह के समय घटी, जब मदीना स्थित तैयबा बिजली वितरण केंद्र को निशाना बनाया गया। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार, मौके से मिले ड्रोन के मलबे और फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो गया कि इस हमले के पीछे हूथी मिलिशिया का हाथ था। इस हमले में एक ट्रांसफार्मर को नुकसान पहुंचा, गनीमत यह रही कि इससे व्यापक बिजली आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय जगत की प्रतिक्रिया
गठबंधन के प्रवक्ता ने इस हमले को दुनियाभर के मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की एक कायराना हरकत करार दिया है। हालांकि, हूथी मिलिशिया ने इन आरोपों से इनकार किया है। इसके बावजूद, इस घटना के बाद कई देशों और संगठनों ने एक सुर में इसकी आलोचना की है। अरब लीग, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने इस हमले की निंदा करते हुए सऊदी अरब का समर्थन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं, खासकर तब जब हाल के महीनों में समुद्री और क्षेत्रीय मोर्चों पर शत्रुता फिर से शुरू हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।