कतर ने इसराइली प्रधानमंत्री के सीरियाई दौरे को बताया अवैध, क्षेत्रीय सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता।

कतर देश की सरकार ने इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरियाई इलाके में जाने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को सीरिया देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताया है। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत दखल देने की बात कही गई है ताकि इस इलाके में तनाव और न बढ़े।
कतर ने सीरियाई सीमा पर इसराइली दौरे को बताया गैरकानूनी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह घटना 10 सितंबर 2026 को सामने आई जब कतर के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया। कतर ने साफ कहा कि इस तरह से सीरियाई जमीन पर जाना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। कतर ने 1974 के संघर्ष विराम समझौते का पालन करने की मांग की है और इसराइली सेना से कहा है कि वह सीरियाई जमीन पर हमले बंद करे ताकि बात आगे न बिगड़े।
इसराइली प्रधानमंत्री का सीरिया दौरा और बयान
यह पूरा मामला इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस दौरे के बाद शुरू हुआ जो उन्होंने 9 सितंबर 2026 को किया था। इस दौरे पर उनके साथ रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ भी मौजूद थे। नेतन्याहू ने माउंट हर्मन से लेकर यारमुक नदी तक के इलाके पर इसराइल का पूरा नियंत्रण होने का दावा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इसराइल किसी भी आतंकी सेना को अपनी सीमा के पास नहीं बसने देगा और उनका मुख्य मकसद ईरान के शासन को कमजोर करना है। वहीं रक्षा मंत्री ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा को संदेश देते हुए कहा कि इसराइली सैनिक सुरक्षा जोन से बाहर नहीं जाएंगे।
सीरिया की तरफ से भी आया विरोध
कतर के अलावा सीरिया के विदेश मंत्रालय ने भी इस दौरे पर कड़ा ऐक्शन लेते हुए इसे अवैध घुसपैठ बताया। सीरिया ने कहा कि इसराइली सेना का वहां रहना देश की आजादी पर हमला है। सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वह बीच में आकर साल 1974 के समझौते को फिर से लागू करवाए। आपको बता दें कि सीरिया में पुरानी सरकार गिरने के बाद से दिसंबर 2024 से ही इस इलाके को इसराइली सेना ने सुरक्षा जोन बना रखा है। इस बारे में अधिक जानकारी आप कतर समाचार एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट में देख सकते हैं।