कतर ने यूएन में की इसराइल की आलोचना, गाजा शांति योजना ठुकराने पर जताई कड़ी नाराजगी.

कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इसराइल के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में साफ तौर पर कहा कि इसराइल का गाजा संघर्ष समाप्त करने वाली शांति योजना को खारिज करना बेहद गलत है। इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Andy Burnham और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney द्वारा किया गया था। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक QNA News पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है।
शांति समझौते को लागू करने की उठी मांग
कतर के प्रधानमंत्री ने इसराइली सरकार पर आरोप लगाया कि वह तय किए गए नियमों और ढांचे का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने दुनिया भर के देशों से अपील की कि वे इसराइल पर दबाव बनाएं ताकि वह संघर्ष विराम समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे और फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों का हनन बंद करे। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि कतर हमेशा से 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के समर्थन में रहा है, जिसकी राजधानी East Jerusalem होनी चाहिए। यह रुख संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और उस व्यापक शांति योजना से मेल खाता है जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा सितंबर 2025 में प्रस्तावित किया गया था और जिसे नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मंजूरी दी थी। इस संबंध में पूरी बात QNA News की रिपोर्ट में विस्तार से बताई गई है।
इसराइली अधिकारियों का कड़ा रुख
दूसरी तरफ इसराइल की ओर से लगातार इस योजना को नकारे जाने की खबरें सामने आ रही हैं। इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने पिछले अगस्त के महीने में ही इस 15-सूत्रीय योजना का विरोध किया था और साफ किया था कि जब तक हमास पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता, तब तक इसराइली सेना गाजा में ही रहेगी। इसके अलावा इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने भी 22 सितंबर 2026 को यह बयान दिया था कि जब तक गाजा को पूरी तरह से हथियारों से मुक्त नहीं किया जाता और हमास को सत्ता से हटाया नहीं जाता, तब तक उनकी सेना वहां अपने ठिकाने बनाए रखेगी।
अरब और इस्लामिक देशों की संयुक्त चेतावनी
इस पूरे मामले पर 22 सितंबर 2026 को कतर, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया। इस संयुक्त बयान में इन सभी देशों ने इसराइल से मांग की कि वह शांति योजना के पहले चरण को तुरंत लागू करे। इन देशों का कहना है कि यह रोडमैप दूसरे चरण के लिए बेहद जरूरी है, जिसमें इसराइली सेना की पूरी तरह से वापसी, एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और गाजा पट्टी में बड़े स्तर पर राहत और पुनर्निर्माण के काम शुरू शामिल हैं। खाड़ी देशों में चल रहे इन घटनाक्रमों का असर वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों और कामगारों पर भी पड़ता है, जो हर स्थिति पर अपनी नजर बनाए रखते हैं।