अमेरिका-ईरान बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कतर का प्रतिनिधिमंडल दोबारा पहुंचा तेहरान
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर का प्रतिनिधिमंडल दोबारा तेहरान पहुंचा। जानिए क्या है नया शांति प्रस्ताव और अमेरिका का रुख।

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच ठंडे पड़े रिश्तों में गर्माहट लाने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता तेज हो गई है। कतर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर तेहरान पहुंचा, जहां वह ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा करेगा। खास बात यह है कि एक ही हफ्ते के भीतर यह कतर के प्रतिनिधियों का दूसरा दौरा है।
राजनयिक कोशिशें पिछले रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को तब तेज हुई थीं जब कतर के प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी अधिकारियों के सामने शांति प्रस्ताव का एक मसौदा पेश किया था। कतर के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच frictions (तनाव) को कम करना है। हालांकि, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने 25 अक्टूबर के उस प्रस्ताव को अस्वीकार्य बताकर खारिज कर दिया था।
ईरान अपनी मांगों पर अडिग है और उसका कहना है कि अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करनी होगी और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने होंगे। साथ ही, ईरान ने अपनी परमाणु नीतियों पर भी कड़ा रुख बनाए रखा है।
इसी बीच, 28 अक्टूबर 2026 को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने खबर दी थी कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई को एक पत्र भेजा है, जिसमें एक नए राजनयिक ढांचे का प्रस्ताव दिया गया है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने पत्र मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन यह साफ किया कि तेहरान ने अभी तक इसका कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति वेंस की यह पहल मुख्य रूप से चिकित्सा आपूर्ति से जुड़ी थी। इसके बावजूद, वॉशिंगटन का मानना है कि किसी भी औपचारिक बातचीत में शुरुआत से ही परमाणु मुद्दों को शामिल करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, जेडी वेंस ने मोहसिन रजाई से व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा जताई है ताकि अधिक सशक्त प्रतिनिधित्व पर चर्चा की जा सके।
बातचीत की शर्तों और उनके क्रम को लेकर दोनों पक्षों में असहमति है, जिससे यह प्रक्रिया जटिल बनी हुई है। इस मध्यस्थता के दौरान सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश भी व्यापक सुरक्षा चर्चाओं में शामिल रहे हैं। अब चर्चा इस बात की है कि उपराष्ट्रपति वेंस और मोहसिन रजाई की मुलाकात अगले हफ्ते दोहा या इस्तांबुल में हो सकती है।