Qatar ने संयुक्त राष्ट्र में खोली ईरान की पोल, मिसाइल हमलों में आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का किया खुलासा.

कतर सरकार ने ईरान के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि हालिया मिसाइल हमले केवल अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर किए गए थे। कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता डॉ. माजिद बिन मोहम्मद अल अंसारी ने 5 सितंबर 2026 को एक बयान में स्पष्ट किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का काम कर रहा है। ईरान इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) प्लेनिपोटेंशियरी कॉन्फ्रेंस के लिए तैयार किए गए एक सुरक्षा जोखिम आकलन दस्तावेज का गलत हवाला दे रहा है। अल अंसारी ने साफ तौर पर कहा कि वह दस्तावेज केवल कामकाज से जुड़ा हुआ था और उसका इन हमलों के किसी भी तरह के कानूनी आकलन से कोई लेना-देना नहीं है। कतर ने इस पूरे मामले में यूएन के सामने पुख्ता सबूत रखे हैं ताकि सच्चाई दुनिया के सामने आ सके।
संयुक्त राष्ट्र में सौंपे गए कतर की तरफ से पुख्ता सबूत
कतर ने इस गंभीर मामले में संयुक्त राष्ट्र के पास आधिकारिक रूप से दस्तावेज जमा किए हैं। इसमें 1 मार्च 2026 (संदर्भ संख्या S/2026/110) और 20 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे गए पत्र शामिल हैं। इन कागजातों में विस्तार से बताया गया है कि ईरान के इन हमलों की वजह से आम लोगों की बस्तियों, व्यापारिक इलाकों और रिहायशी जगहों को भारी नुकसान पहुंचा है। कतर के मुताबिक, 18 मार्च 2026 को रास लाफ्तान गैस फैसिलिटीज पर भी हमला किया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च 2026 को हुए हमलों में कुल 16 लोग घायल हुए थे। इसके अलावा 20 जुलाई 2026 की घटना में एक छोटे बच्चे समेत तीन अन्य लोग भी जख्मी हो गए थे।
अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और यूएन चार्टर का मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र में कतर की स्थायी प्रतिनिधि शेखा आलिया अहमद बिन सैफ अल-थानी ने ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के बयानों का कड़ा जवाब देते हुए ये सभी दस्तावेज यूएन को सौंपे हैं। कतर का कहना है कि ये हमले सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करते हैं, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ ताकत के इस्तेमाल पर रोक लगाता है। इसके साथ ही कतर ने आत्मरक्षा के नाम पर ईरान द्वारा अनुच्छेद 51 के इस्तेमाल किए जाने वाले तर्क को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कतर की इस बात को QNA की आधिकारिक रिपोर्ट में भी विस्तार से साझा किया गया है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) में भी इन सभी कृत्यों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक ही बात सीमित नहीं रही, बल्कि दोहा ने यह भी बताया कि ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना और समुद्री जहाजों की आवाजाही में बाधा डालना भी खुलेआम आक्रामकता और दुश्मनी को दिखाता है। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां सफर करने वाले यात्रियों के मन में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।