कतर के अमीर का कड़ा संदेश: बातचीत हमारी नीति, पर शांति को कमज़ोरी न मानें. हम हथियार कभी भी उठा सकते हैं।

दोहा: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने 13 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर साफ़ किया कि उनका देश संवाद और शांतिपूर्ण तरीकों से विवाद सुलझाने की नीति पर कायम है। लेकिन इसी बयान में उन्होंने यह भी जता दिया कि कूटनीति की इस प्रतिबद्धता को देश की सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में ढिलाई नहीं समझा जाना चाहिए।
अमीर ने कहा कि शांति और संवाद के प्रति हमारा लगाव इसका मतलब नहीं कि हम अपने देश की रक्षा में नरमी बरतेंगे। उनके इस बयान को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां अमेरिका, ईरान और कई क्षेत्रीय संघर्ष एक साथ चल रहे हैं।
जलमार्ग और ऊर्जा ढांचे पर ज़ोर
अपने संबोधन में शेख तमीम ने खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा के लिए प्रयास तेज़ करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने नागरिक ढांचे और ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा को भी उतना ही अहम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों की सुरक्षा और उनकी सामूहिक संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
इस रुख़ की अहमियत इसलिए भी है कि ईरान ने 12 अक्टूबर तक पुष्टि की थी कि अमेरिका के साथ आधिकारिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी है और इसमें कतर तथा पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने कहा कि ये मध्यस्थता के रास्ते अभी खुले हैं। इसी महीने की शुरुआत में ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने दोहा में शेख तमीम से सीधी मुलाकात की थी।
कतर की कूटनीति कई मोर्चों पर चल रही है। 12 अक्टूबर को कतर कैबिनेट ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अमीर के संबोधन की सराहना की, जिसमें लचीलापन और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर ज़ोर था। प्रधानमंत्री के सलाहकार और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद अल अंसारी ने दोहराया कि कतर ईरान संकट का टिकाऊ हल और गाज़ा में युद्धविराम के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
उसी दिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में "दोहा प्रक्रिया" पर चर्चा हुई, जो कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से जुड़े विवाद में कतर की मध्यस्थता की पहल है। यह दिखाता है कि कतर की भूमिका सिर्फ़ खाड़ी तक सीमित नहीं, बल्कि शांति स्थापना के बड़े वैश्विक मंच तक फैली है।