कतर के अमीर का ऐलान: क्षेत्रीय कूटनीति पर कायम रहेगी प्रतिबद्धता

दोहा: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने 13 अक्टूबर 2026 को शूरा काउंसिल के वार्षिक सत्र में देश की उस नीति को फिर से दोहराया, जिसके तहत कतर सक्रिय कूटनीति के जरिए क्षेत्र के संकटों का हल खोजना चाहता है। इस मौके पर उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही।
सत्र को संबोधित करते हुए अमीर ने कहा, "हम सूडान, लीबिया, यमन और सोमालिया के संकटों के समाधान के लिए अपने अडिग रुख पर कायम हैं।" उन्होंने बताया कि कतर की राष्ट्रीय रणनीति चार स्तंभों पर टिकी है। इसमें संवाद, संप्रभुता की रक्षा और देश की हिफाज़त जैसे पहलू शामिल हैं।
ईरानी हमलों पर सख्त रुख
अमीर ने कतर की धरती पर हाल में हुए ईरानी हमलों की साफ शब्दों में निंदा की। उन्होंने इन हमलों को देश की संप्रभुता का "खुला उल्लंघन" बताया। साथ ही खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन को सुरक्षित बनाने के लिए और ठोस प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक ऊर्जा संयंत्रों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
यह संबोधन पिछले कुछ हफ्तों की उच्चस्तरीय कूटनीतिक गतिविधियों के बाद आया है। 29 सितंबर 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने क्षेत्रीय अस्थिरता के गंभीर नतीजों से आगाह किया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्रालय के मीडिया और संचार विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन सुल्तान अल-हाश्मी ने बताया कि विवादित पक्षों के बीच बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, ताकि क्षेत्रीय संघर्ष का कोई स्वीकार्य हल निकल सके।
अमीर ने माना कि इस क्षेत्रीय युद्ध का असर कतर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। इस युद्ध में 2026 की शुरुआत में राज़ लफ़ान के ऊर्जा ढांचे पर हमले भी हुए थे। उन्होंने ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की ज़रूरत पर बात की।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के कारण मध्य पूर्व और मध्य एशिया की विकास दर के धीमे रहने का अनुमान जताया है। ऐसे माहौल में कतर अपनी सुरक्षा साझेदारियों को मजबूत कर रहा है और मध्यस्थ की अपनी भूमिका को बनाए हुए है।