Qatar Sovereign Rating: कतर पर फिच रेटिंग्स का बड़ा फैसला, AA रेटिंग बरकरार लेकिन निगेटिव आउटलुक जारी.

Aanya5 September 20262 min read26 viewsQatar
Qatar Sovereign Rating: कतर पर फिच रेटिंग्स का बड़ा फैसला, AA रेटिंग बरकरार लेकिन निगेटिव आउटलुक जारी.

कतर देश के नागरिकों और वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए एक बड़ी वित्तीय खबर सामने आई है। मशहूर रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने ईरान के साथ चल रहे तनाव और ब्लॉकबेड के बीच कतर की सॉवरेन रेटिंग को लेकर एक अहम घोषणा की है। एजेंसी ने देश को Rating Watch Negative से बाहर निकाल लिया है और इसकी सॉवरेन रेटिंग को AA पर सुरक्षित रखा है। हालांकि इसके बावजूद एजेंसी ने देश का आउटलुक Negative ही बनाए रखा है, जिसकी मुख्य वजह कतर के सामने खड़े क्षेत्रीय खतरे और व्यापारिक बाधाएं हैं।

कतर की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

कतर में लिक्विड नेचुरल गैस यानी LNG की सुविधाओं को इस साल मार्च के महीने में ईरानी मिसाइल हमलों से बड़ा नुकसान पहुंचा था। इस हमले की वजह से देश की सालाना एलएनजी क्षमता में 12.8 million tonnes की भारी कमी आ गई थी। इसके साथ ही देश को हर साल लगभग $20 billion यानी 20 अरब डॉलर के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन सभी उत्पादन समस्याओं और निर्यात में आ रही रुकावटों की वजह से फिच रेटिंग्स का अनुमान है कि साल 2026 में कतर की अर्थव्यवस्था में 18.8% की बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। इस वजह से देश को जीडीपी का 2.7% तक का राजकोषीय घाटा भी झेलना पड़ सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि साल 2027 में अर्थव्यवस्था में जोरदार वापसी की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

होरमुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय हालात

फिच का यह मानना है कि होरमुज जलडमरूमध्य से होने वाला निर्यात साल 2027 की पहली तिमाही में फिर से सुचारू रूप से शुरू हो जाएगा। मार्च में हुए नुकसान को छोड़कर, युद्ध से पहले की अपनी पूरी क्षमता को बहाल होने में लगभग छह महीने का समय और लग सकता है। कतर की मजबूत AA रेटिंग के पीछे मुख्य वजह वहां की हाई जीडीपी प्रति व्यक्ति, बड़े सॉवरेन एसेट्स और भविष्य में गैस उत्पादन बढ़ने की उम्मीदें हैं, जिससे आने वाले समय में देश की वित्तीय स्थिति और ज्यादा मजबूत होगी। इस पूरे क्षेत्रीय विवाद की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ Operation Epic Fury की शुरुआत की थी। इसके बाद से ही पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और इसका असर सीधे तौर पर वहां की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।

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