क्षेत्रीय तनाव और हमलों के बावजूद कतर ने ईरान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखे ताकि शांति बनी रहे

दोहा: कतर के उप प्रधानमंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमन अल-थानी ने साफ किया है कि क्षेत्रीय संघर्षों और कतरी इलाके में हुए हमलों के बावजूद दोहा ने ईरान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अलग-अलग विचार होने के बावजूद संवाद जारी है।
दोहा में ग्लोबल सिक्योरिटी फोरम के दौरान बोलते हुए उप प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भरोसे की बुनियाद पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस क्षेत्र के संयुक्त विकास ने इस रिश्ते को मजबूती दी है।
शेख सऊद बिन अब्दुलरहमन अल-थानी के मुताबिक, जून 2026 से पहले दोनों देशों के बीच सीधे टकराव की कोई घटना नहीं हुई थी, हालांकि 2025 में ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई थी।
उन्होंने चेतावनी दी कि खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट के कारण जो आर्थिक असर पड़ रहा है, वह अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है। आने वाले महीनों में इसके और परिणाम सामने आ सकते हैं।
क्षेत्रीय तनाव के बीच मार्च 2026 में कतर के रस लफ्फन औद्योगिक परिसर पर हमला हुआ था, जो लिक्विफाइड नेचुरल गैस उत्पादन का एक अहम केंद्र है। प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन अल थानी ने पहले इस हमले की निंदा की थी क्योंकि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ता है।
इन चुनौतियों के बीच कतर लगातार एक ऐसे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की वकालत कर रहा है जिसमें खाड़ी देशों और ईरान दोनों शामिल हों, ताकि भविष्य में टकराव को रोका जा सके।
राजनयिक स्तर पर भी गतिविधियां जारी हैं। सितंबर 2026 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन अल थानी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच मुलाकात हुई थी, जिसमें तनाव कम करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
कतर अपनी राजनयिक स्थिति का इस्तेमाल ईरान और अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय देशों के बीच मध्यस्थता के लिए कर रहा है। वह विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और नेविगेशन से जुड़े प्रस्तावों के आदान-प्रदान में मदद कर रहा है।