Qatar और Iran के बीच Hormuz Strait को लेकर बड़ी बातचीत, माइंस हटाने और नए रास्ते पर बनी बात.

गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को कतर के विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा ऐलान किया है। इस घोषणा के मुताबिक कतर और ईरान के अधिकारियों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी Strait of Hormuz से खदानों या माइंस को हटाने को लेकर अहम चर्चा हुई है। यह पूरी बातचीत तेहरान में हुई जहां कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani खुद मौजूद थे। इस मीटिंग के दौरान एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते यानी शिपिंग कॉरिडोर को अस्थायी रूप से शुरू करने पर भी बात की गई ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
कतर और ओमान की कूटनीति
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमैन अल थानी ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पड़ोसी देशों की संप्रभुता का पूरा सम्मान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समंदर में जहाजों की आवाजाही की पूरी आजादी मिलनी चाहिए ताकि व्यापार और सफर करने वाले लोगों को कोई दिक्कत न हो। उन्होंने आपसी विवादों को खत्म करने के लिए लगातार कूटनीतिक बातचीत जारी रखने की बात कही है। इसी तरह की अलग बातचीत ईरान और ओमान के बीच भी चल रही है जिसमें ओमान के विदेश मंत्री Bdr Albusaidi ने बहुत जल्द कोई नई घोषणा करने की उम्मीद जताई है। ओमान भी इस इलाके में ट्रांजिट रूट और माइंस साफ करने के काम में लगा हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव
इन तमाम कोशिशों के बावजूद इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei का साफ कहना है कि यह रास्ता तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका जून महीने में हुए समझौते यानी MoU की शर्तों को पूरा नहीं करता। ईरान चाहता है कि अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी को पूरी तरह से हटाए और इस संघर्ष को समाप्त करे। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने यह भी चेतावनी दी है कि केवल ईरान को ही पता है कि पानी के नीचे माइंस कहां-कहां छिपाई गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी डिमाइनिंग पोत वहां आए तो उन्हें वैध निशाना बनाया जाएगा।
क्षेत्रीय मध्यस्थता और सुरक्षा चिंताएं
इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर मध्यस्थता की कोशिशें लगातार जारी हैं। हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir ने तेहरान में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ लंबी बातचीत की है। दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बावजूद अमेरिका के सहयोगी देशों को यह भरोसा नहीं हो रहा है कि इस इलाके से पूरी तरह माइंस साफ कर दी गई हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि इसका सीधा असर समुद्री व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ता है जिससे आम जनता की जेब पर भी बोझ बढ़ता है।