सऊदी अरब पर ड्रोन हमले के बाद कतर और जॉर्डन ने की बैठक, क्षेत्रीय शांति पर हुई चर्चा।

सऊदी अरब के ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए खतरनाक ड्रोन हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। इस गंभीर स्थिति को संभालने और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 12 सितंबर 2026 को कतर और जॉर्डन के शीर्ष नेताओं के बीच एक अहम बातचीत हुई। इस औपचारिक चर्चा में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलrahman बिन جassim अल थानी और जॉर्डन के उप प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री डॉ. अयमन सफादी ने हिस्सा लिया। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ते तनाव को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना बहुत जरूरी है ताकि पूरे इलाके में शांति और स्थिरता कायम की जा सके।
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा
कतर के प्रधानमंत्री ने इस बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि उनका देश समुद्री यातायात को सुरक्षित रखने और क्षेत्र में स्थाई शांति स्थापित करने वाले हर कूटनीतिक प्रयास का पूरा समर्थन करता है। हाल ही में सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर इराकी क्षेत्र से एक ड्रोन हमला किया गया था। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की थी कि इस हमले की वजह से जानमाल का नुकसान हुआ है और कई जगहों पर भारी सामग्री क्षति भी हुई है। इस घटना के बाद से ही खाड़ी देशों में हड़कंप मचा हुआ है और कूटनीतिक हलकों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
विभिन्न देशों और संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया
सऊदी अरब पर हुए इस हमले के बाद कतर, जॉर्डन और अरब लीग ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। इन सभी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने बयान जारी कर कहा कि ऊर्जा परिवहन लाइनों को निशाना बनाना सीधे तौर पर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए भारी जोखिम पैदा करता है। इस बीच, नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक के दौरान 11 देशों के ब्रिक्स समूह ने भी सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। इसके अलावा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद ने भी क्षेत्रीय तनाव को कम करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए आपस में मुलाकात की।
इराक और सऊदी अरब के बीच कूटनीतिक स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ीदी ने सऊदी अरब से अनुरोध किया है कि वह फिलहाल किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से बचे ताकि बगदाद सरकार खुद आगे बढ़कर इन खतरों से निपट सके। हालांकि, सऊदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक स्रोत QNA News और Saudi Press Agency पर जा सकते हैं। इस प्रकार की घटनाओं का असर उन प्रवासी भारतीयों पर भी पड़ सकता है जो रोजगार के सिलसिले में खाड़ी देशों में रहते हैं, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता से सुरक्षा और आर्थिक माहौल दोनों प्रभावित होते हैं।