Qatar PM का तेहरान दौरा, अमेरिका और ईरान के बीच अटकी बातचीत को दोबारा शुरू करने की बड़ी कोशिश.

Praggya Singh sabal27 August 20263 min read58 viewsQatar
Qatar PM का तेहरान दौरा, अमेरिका और ईरान के बीच अटकी बातचीत को दोबारा शुरू करने की बड़ी कोशिश.

कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाने के लिए तेहरान का दौरा किया है। यह अहम कूटवर्तिक मिशन 27 अगस्त 2026 को शुरू हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना और बातचीत के नए रास्ते खोलना है। इस यात्रा से पहले 17 जून को एक संघर्ष विराम लागू हुआ था, जिससे क्षेत्रीय दुश्मनी में कुछ कमी आई थी, लेकिन जून में ही तैयार किया गया अगला समझौता अगले महीने ही टूट गया था। इस बार की बैठकों में मुख्य रूप से क्षेत्रीय शांति, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित करने और चल रहे तनाव को खत्म करने पर चर्चा की जा रही है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का सख्त रुख

क्षेत्रीय सुरक्षा अभी भी सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता Hossein Mohebbi ने बुधवार को साफ कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी ईरान के नियंत्रण में है। IRGC का यह कड़ा बयान सामने आया है कि उनकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं निकल सकता है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस रास्ते को तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक अमेरिका उनकी शर्तें नहीं मान लेता। इन शर्तों में मुख्य रूप से प्रतिबंधों को हटाना, मुआवजा देना और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी को खत्म करना शामिल है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ईरान और ओमान के बीच इस रास्ते को लेकर समझौते की बात सामने आई थी, लेकिन रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने साफ किया कि अभी तक कोई भी अंतिम समझौता नहीं हुआ है.

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आर्थिक दबाव और लापता पायलटों का मुद्दा

यह पूरी कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर से नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके जवाब में ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सार्वजनिक रूप से यह बात कही है कि अमेरिका का यह आर्थिक दबाव अपने उद्देश्यों को हासिल करने में पूरी तरह नाकाम साबित होगा। इसके अलावा, कतर का प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच के अन्य पुराने मामलों पर भी बात कर रहा है। इसमें ईरान की वह मांग भी शामिल है जिसमें उन्होंने कतर के पास एक अमेरिकी बेस पर हुए हमलों के दौरान 12 मार्च को अपने जेट विमानों के गिराए जाने के बाद लापता हुए तीन पायलटों के बारे में जानकारी मांगी है। कतर के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वह अभी भी इन लापता पायलटों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी से अनजान हैं.

कूटनीति ही सबसे बेहतर रास्ता

कतर के अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्रीय मतभेदों को सुलझाने और 28 फरवरी से पहले की स्थिति को वापस लाने के लिए बातचीत ही सबसे असरदार रास्ता है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Majed Al Ansari लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि शांति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को कूटनीति का ही सहारा लेना चाहिए। गल्फ देशों में रहने वाले लोगों और भारत से वहां आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह शांति प्रक्रिया बहुत जरूरी है क्योंकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से विमान सेवाओं और व्यापार पर सीधा असर पड़ता है। आम जनता यही उम्मीद कर रही है कि इन बैठकों से कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा और पूरे इलाके में अमन-चैन कायम होगा।

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