कतर के प्रधानमंत्री पहुंचे तेहरान, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और तनाव कम करने पर हुई अहम चर्चा

Praggya Singh sabal27 August 20262 min read29 viewsQatar
कतर के प्रधानमंत्री पहुंचे तेहरान, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और तनाव कम करने पर हुई अहम चर्चा

गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने तेहरान की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ उच्च स्तर की बैठक की। UNI India की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव शुरू होने के बाद से कतर के प्रधानमंत्री की यह पहली ईरान यात्रा है। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चर्चा करना था।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर विशेष जोर

दोनों देशों के अधिकारियों ने जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाने के लिए एक प्रस्तावित अंतरिम ढांचे को लागू करने पर विचार-विमर्श किया। इस योजना में क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अस्थायी संयुक्त शिपिंग कॉरिडोर बनाना और वहां से बारूदी सुरंगों को हटाने की एक साझा परियोजना शामिल है। बैठकों के दौरान, शेख मोहम्मद ने इस बात पर जोर दिया कि पड़ोसी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना और सभी जहाजों के लिए नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। कतर हमेशा से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए पड़ोसी देशों के साथ मिलकर काम करता आया है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले और सफर करने वाले लोगों को भी राहत मिलती है।

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कतर की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कतर की लगातार मध्यस्थता भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच संवाद के रास्ते खुले रखने में कतर के निरंतर प्रयासों की सराहना की। यह यात्रा कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए जून में हस्ताक्षरित एक पिछले समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद हो रही है। उस समझौते ने शुरुआत में शत्रुता को रोक दिया था, लेकिन समुद्री पारगमन नीतियों पर विवादों के कारण वह प्रक्रिया रुक गई थी। वर्तमान बातचीत बढ़ते आर्थिक दबावों के बीच इन कूटनीतिक रास्तों को फिर से जीवंत करने का एक प्रयास है।

इस पूरी बैठक और कूटनीतिक बैठकों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप UNI India की रिपोर्ट देख सकते हैं। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत को ही मुख्य जरिया बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इस तरह की उच्च स्तरीय बैठकों से खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लौटने की उम्मीद बंधती है, जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले प्रवासियों और व्यापार पर पड़ता है।

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