क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कतर ने ईरान को सौंपा नया ड्राफ्ट समझौता
कतर ने अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के युद्ध को रोकने के लिए एक नया ड्राफ्ट समझौता पेश किया है, जिस पर ईरान विचार कर रहा है।

दोहा: कतर के मध्यस्थों ने अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए तेहरान को एक नया ड्राफ्ट समझौता सौंपा है। यह प्रस्ताव रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को दिया गया था, जिसकी जानकारी बुधवार को सामने आई। एक अधिकारी के मुताबिक ईरान फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और इस हफ्ते के अंत तक अपना औपचारिक जवाब दे सकता है।
इस ड्राफ्ट समझौते में दोनों पक्षों की शिकायतों को दूर करने के लिए सात दिनों की समयसीमा तय की गई है। इसमें विश्वास बहाली के लिए रोजाना कुछ कदम उठाने का सुझाव है, जो अगले हफ्ते से शुरू हो सकते हैं। जानकारी मिली है कि कई देश इस समझौते के लिए गारंटी देने को तैयार हैं।
तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए यह राजनयिक प्रयास वॉशिंगटन के साथ समन्वय करके किए गए हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिससे अमेरिकी सेना को अक्टूबर के मध्य तक कम से कम 47.1 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ा है।
क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए सोमवार, 26 अक्टूबर को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने तेहरान में ईरानी समकक्षों के साथ बातचीत की। दूसरी ओर, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि मध्यस्थता के प्रभावी होने के लिए ईरान को अरब खाड़ी देशों को धमकी देना बंद करना होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा।
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायली सैन्य कार्रवाई का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ने वाला असर वैश्विक गैस आपूर्तिकर्ताओं और उपभोक्ताओं के लिए मुख्य चिंता का विषय है।
क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। 27 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया। यह संकेत है कि यदि अमेरिका या इजरायल ने ईरान पर हमले फिर से शुरू किए, तो आक्रामकता बढ़ सकती है।
वहीं यमन में भी संघर्ष जारी है, जहां सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद मिस्र ने सऊदी साम्राज्य को रक्षात्मक सैन्य सहायता देने की मंजूरी दी है। ये सभी घटनाक्रम 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बीच हो रहे हैं, जिसके बाद अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।