कतर ने ईरान के दावों को किया खारिज, रास लफ्तान गैस फैसिलिटी पर हमले को लेकर दी पूरी जानकारी।

कतर की सरकार ने ईरान के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें रास लफ्तान गैस फैसिलिटी पर हमले से इनकार किया गया था। 4 सितंबर 2026 को कतर के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरानी प्रवक्ता ने इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के लिए तैयार एक सुरक्षा दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा था कि कतर में ईरानी सैन्य कार्रवाई केवल अमेरिकी बलों पर थी और किसी भी नागरिक इलाके को निशाना नहीं बनाया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि 18 मार्च 2026 को रास लफ्तान सुविधा पर हुआ हमला अमेरिकी अभियानों के खिलाफ एक सैन्य उद्देश्य के तहत था।
कतर विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख
कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता मजेद अल-अंसरी ने ईरानी बयानों को पूरी तरह भ्रामक और चुनिंदा सुरक्षा जोखिम आकलन का गलत मतलब बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए कतर के औपचारिक पत्रों को देखें, जिनके दस्तावेज नंबर S/2026/207 और S/2026/591 हैं। इन सरकारी दस्तावेजों में ईरान की तरफ से लगातार आ रही मिसाइल और ड्रोन हमलों के बारे में विस्तार से बताया गया है। मजेद अल-अंसरी ने जानकारी दी कि इन औपचारिक शिकायतों को दर्ज कराने से पहले ही ईरानी बलों ने कतर पर कुल 83 मिसाइल और 12 ड्रोन दागे थे। हालांकि कतर की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने इनमें से 81 मिसाइलों और 11 ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया था, फिर भी हमलों के मलबे और धमाकों से नागरिक, व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा था। इन हमलों की चपेट में आने से कुल 16 लोगों को मामूली चोटें भी आईं थीं।
संयुक्त राष्ट्र में दर्ज कराए गए आंकड़े
कतर की तरफ से संयुक्त राष्ट्र को 20 जुलाई को सौंपे गए एक अन्य दस्तावेज S/2026/591 में भी उन हमलों का पूरा ब्योरा दिया गया है जिनमें एक बच्चे सहित 3 लोग घायल हो गए थे। प्रवक्ता मजेद अल-अंसरी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि कतर इस मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष का बिल्कुल भी हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर की जमीन, उसकी बुनियादी संरचना और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्तों पर खतरा पैदा करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का साफ उल्लंघन है। याद दिला दें कि 18 मार्च को रास लफ्तान प्लांट पर हुए हमले के बाद से कतरएनर्जी को लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी की सप्लाई को लेकर फोर्स माजेर घोषित करना पड़ा था, जिसकी मरम्मत का काम कई सालों तक चलने की उम्मीद है।
कतर के अधिकारियों ने साफ किया कि यह गैस प्लांट पूरी तरह से एक नागरिक संपत्ति है जो दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। इसके साथ ही कतर ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका ईरान के साथ किसी भी तरह का सीधा संवाद नहीं है और देश अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों और भारत से ताल्लुक रखने वाले कामगारों के लिए भी ऐसी सुरक्षा घटनाएं चिंता का विषय बनती हैं, क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता से ही नौकरी और कारोबार का माहौल सुरक्षित रहता है। कतर सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की बात कह रही है और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रही है।