इजरायल चुनाव में हस्तक्षेप के आरोपों को कतर ने नकारा और इसे हास्यास्पद और खतरनाक बताया
कतर ने इजरायली राजनेताओं द्वारा लगाए गए चुनाव हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए इसे हास्यास्पद और खतरनाक बताया है।

दोहा: कतर ने इजरायली संसदीय चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने इन आरोपों को हास्यास्पद और खतरनाक करार दिया है।
यह विवाद 27 अक्टूबर 2026 को हुए इजरायली चुनावों के बाद शुरू हुआ। अल-अंसारी ने कहा कि कतर कुछ इजरायली नेताओं की राजनीतिक विफलताओं का बलि का बकरा बनने से इनकार करता है। उन्होंने बताया कि कतर पर अलग-अलग समय पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुद पार्टी से लेकर इजरायली वामपंथियों और अरब मतदाताओं को प्रभावित करने के विरोधाभासी आरोप लगाए गए हैं।
ये आरोप मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके सहयोगियों, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच शामिल हैं, द्वारा लगाए गए हैं। यह विवाद तब बढ़ा जब 120 सदस्यीय नेसेट में फिलिस्तीनी पार्टियों ने 19 सीटें हासिल कीं।
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन-गवीर ने अरब राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी का सुझाव दिया था। वहीं, इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जज नोम सोहलबर्ग ने संदिग्ध विदेशी हस्तक्षेप की जांच के लिए शिन बेट से अनुरोध किया था।
हालांकि, इजरायली पुलिस और चुनाव समिति दोनों ने पुष्टि की है कि उन्हें चुनाव धोखाधड़ी या किसी व्यवस्थित अनियमितता का कोई सबूत नहीं मिला है। इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने जांच की मांग की है, लेकिन साथ ही उन्होंने अरब इजरायली समुदाय को कलंकित न करने की चेतावनी भी दी है।
विपक्ष के नेता गादी ईसेनकोट ने आगाह किया है कि इन दावों का इस्तेमाल नई नेसेट के शपथ ग्रहण में देरी करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। विश्लेषक अब्दुल्ला अल-एतैबी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नेतन्याहू की यह बयानबाजी गाजा में अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने की एक कोशिश है।
इससे पहले मार्च 2025 में 'कतारगेट' जांच हुई थी, जिसमें नेतन्याहू के दो सहायकों को कथित भुगतान के मामले में गिरफ्तार किया गया था। कतर ने उस समय भी इन दावों को नकारा था। कतर का कहना है कि वह राजनयिक प्रयासों और फिलिस्तीनी लोगों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।