Qatar का कड़ा जवाब, संयुक्त राष्ट्र में Netanyahus के भाषण का बहिष्कार और आरोपों को किया खारिज.

Aanya25 September 20263 min read7 viewsQatar
Qatar का कड़ा जवाब, संयुक्त राष्ट्र में Netanyahus के भाषण का बहिष्कार और आरोपों को किया खारिज.

कतर देश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA के मंच से इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu द्वारा लगाए गए सभी गंभीर आरोपों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को दिए गए इस भाषण के दौरान कतर के प्रतिनिधिमंडल की कुर्सियां बिल्कुल खाली रहीं, जिसका मुख्य कारण इजराइल की नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराना था। इस विरोध प्रदर्शन में कतर के साथ दुनिया भर के दर्जनों अन्य देश भी शामिल रहे, और इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय हॉल में कुल 77 प्रतिनिधिमंडल अनुपस्थित थे या फिर उन्होंने बाहर निकलना बेहतर समझा। इजराइली प्रधानमंत्री ने अपने 41 मिनट के लंबे संबोधन में दावा किया था कि कतर ने दुनिया भर में इजराइल के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने और पब्लिक ओपिनियन को प्रभावित करने के लिए पानी की तरह अरबों डॉलर खर्च किए हैं। इसके अलावा, उन्होंने कतर पर हमास के नेतृत्व को शरण देने का भी बड़ा आरोप मढ़ा, जिस पर अब खाड़ी देश की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

Dr. Majed Al Ansari का बयान और मानवीय संकट पर बात

कतर के प्रधानमंत्री के सलाहकार और विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता Dr. Majed Al Ansari ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सब केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि दुनिया का ध्यान फिलिस्तीनी बस्तियों में चल रहे संघर्ष और उसके कारण पैदा हुए भयानक मानवीय संकट से भटकाया जा सके। उन्होंने बहुत साफ शब्दों में कहा कि आज की युवा पीढ़ी और दुनिया भर के आम लोगों की सोच में जो बदलाव आया है, उसे किसी इन्फ्लुएंस कैंपेन का नतीजा बताना सीधे तौर पर लोगों की समझदारी और जागरूकता का अपमान करना है। लोग खुद अपनी आँखों से टीवी और सोशल मीडिया पर सब कुछ लाइव देख रहे हैं, इसलिए उन्हें किसी बहकावे की जरूरत नहीं है। इस तरह के बेबुनियाद बयानों से सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता है और कतर हमेशा से शांति की बात करता आया है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

Hamad al-Maftuh ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर क्या कहा

अमेरिका में कतर के उप राजदूत Hamad al-Maftuh ने इस पूरे मामले पर बात करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू के भाषण के दौरान हॉल का आधा खाली रहना इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी इस भाषा और नीतियों को बहुत कम समर्थन मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कतर हमेशा से एक बेहद अहम और भरोसेमंद मध्यस्थ यानी मीडिएटर की भूमिका निभाता आया है। देश ने इससे पहले भी कई बार युद्धविराम यानी सीजफायर और बंधकों की रिहाई से जुड़े बड़े समझौतों को सफलतापूर्वक पूरा कराने में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे याद दिलाया कि अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी ताकतों ने हमेशा कतर की इस राजनयिक भूमिका की खुले तौर पर सराहना की है और इसे शांति के लिए जरूरी माना है।

तनाव का पुराना इतिहास और कतर की मध्यस्थता की भूमिका

इजराइल और कतर के बीच यह राजनयिक तनाव कोई नया नहीं है, बल्कि इससे पहले भी दोनों देशों के रिश्तों में खटास देखी जा चुकी है। साल 2025 में एक ऐसी ही घटना सामने आई थी जब इजराइली सेना ने दोहा के पास हमास के नेतृत्व को निशाना बनाकर एक एयरस्ट्राइक की थी। उस हमले के बाद उपजे तनाव के माहौल में खुद प्रधानमंत्री नेतन्याहू को कतर के सामने माफी मांगनी पड़ी थी, जो खाड़ी देशों की कूटनीतिक ताकत को साफ दिखाता है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से ताल्लुक रखने वाले कामगारों के लिए भी ऐसी खबरें बहुत मायने रखती हैं क्योंकि मध्य पूर्व में शांति या अशांति का सीधा असर वहां की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ता है। कतर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए यह साबित कर दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और फिलिस्तीनी मुद्दों के समाधान के लिए अपनी राजनयिक कोशिशें आगे भी पूरी ईमानदारी के साथ जारी रखेगी।

Share:

Comments

Leave a comment