कतर-सऊदी ऊर्जा समझौता; अल-काबी ने कहा, ऊर्जा को राजनीति से दूर रखें

रियाद: कतर और सऊदी अरब ने ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 11 अक्टूबर 2026 को रियाद में 17वीं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फोरम मंत्रीस्तरीय बैठक और 25वीं WPC ऊर्जा कांग्रेस के दौरान हुआ। इस मौके पर कतर के ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और QatarEnergy के अध्यक्ष एवं सीईओ साद शेरिदा अल-काबी और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान अल सऊद मौजूद थे।
इस समझौते के तहत दोनों देश तेल और गैस, रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल, बिजली, स्वच्छ हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। समझौते में कार्बन कैप्चर और स्टोरेज जैसी जलवायु परिवर्तन रोकथाम की तकनीकों पर भी सहमति बनी है। दोनों देश स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में भी काम करेंगे। यह समझौता दोनों देशों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
समझौते से जुड़े कार्यक्रम में साद शेरिदा अल-काबी ने दुनिया से ऊर्जा को राजनीति से ऊपर रखने की अपील की। उन्होंने ऊर्जा संसाधनों को हथियार बनाने के खतरे पर चेतावनी दी। उनका कहना था कि ऊर्जा सुरक्षा का मकसद देशों को जोड़ना होना चाहिए, बांटना नहीं। उन्होंने बताया कि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्षों से वैश्विक हाइड्रोकार्बन आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत प्रभावित हुआ है और ऊर्जा संपत्तियों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
अल-काबी ने ऊर्जा क्षेत्र की मानवीय ज़रूरत की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार दुनिया में लगभग एक अरब लोगों तक बिजली नहीं पहुंचती, जबकि चार अरब लोग खाद्य उत्पादन के लिए ऊर्जा-गहन कृत्रिम उर्वरकों पर निर्भर हैं। इसी बीच उन्होंने हाल के हूती हमलों में प्रभावित लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और इस अवसर पर सऊदी अरब के साथ एकजुटता दिखाई।