कतर और सिंगापुर ने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने का फैसला किया और व्यापार व ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया

दोहा: कतर और सिंगापुर ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने पर औपचारिक सहमति जताई है। इस फैसले के बाद सऊदी अरब के बाद कतर मिडिल ईस्ट में सिंगापुर का दूसरा रणनीतिक साझेदार बन जाएगा।
यह अहम फैसला 19 अक्टूबर 2026 को दोहा में कतर-सिंगापुर उच्च स्तरीय संयुक्त समिति (HLJC) की नौवीं बैठक के दौरान लिया गया। समिति के 20 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि इसकी अध्यक्षता दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने की। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने इस सत्र की सह-अध्यक्षता की।
प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग 18 से 20 अक्टूबर 2026 तक कतर के दौरे पर थे। पद संभालने के बाद यह उनका मिडिल ईस्ट का पहला आधिकारिक दौरा था। प्रस्तावित साझेदारी के जरिए दोनों देश व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टिकाऊ विकास, डिजिटलाइजेशन, सुरक्षा और मानव पूंजी विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग गहरा करेंगे।
इस साझेदारी की औपचारिक शुरुआत भविष्य में अमीर की सिंगापुर यात्रा के दौरान होने की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के रिश्तों का मुख्य आधार बना हुआ है। वर्तमान में सिंगापुर अपनी कुल एलएनजी (LNG) आयात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा कतर से मंगवाता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान कतरएनर्जी और सिंगापुर के ऊर्जा, व्यापार और उद्योग मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) का नवीनीकरण किया गया। यह समझौता एलएनजी आपूर्ति की सुरक्षा और लो-कार्बन तकनीक पर केंद्रित है। बैठक में सितंबर 2026 में हुई कार्यान्वयन निगरानी तंत्र की बैठक के नतीजों की भी समीक्षा की गई।
इस मौके पर कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी, सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन और सिंगापुर के ऊर्जा, व्यापार और उद्योग मंत्री डॉ. तन सी लेंग भी मौजूद थे।