हूती हमलों के बीच कतर ने जताया सऊदी अरब का समर्थन और कहा कि दोनों देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी है

दोहा: हूती विद्रोहियों के लगातार बढ़ते सैन्य हमलों के बीच कतर ने सऊदी अरब के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा सीधे तौर पर कतर की राष्ट्रीय सुरक्षा और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की सामूहिक स्थिरता से जुड़ी हुई है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हूती बलों ने सऊदी अरब की सीमा और यमन सरकार के ठिकानों पर हमलों को तेज कर दिया है। 20 अक्टूबर 2026 को यमन के शबवा प्रांत में एक सैन्य कैंप पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई और करीब 200 रिक्रूट घायल हो गए।
हूती विद्रोहियों ने पिछले 48 घंटों में छह सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी ली है। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया। उनके निशाने पर किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यानबू में सऊदी अरामको की सुविधाएं, शैबाह तेल क्षेत्र और खमीस मुशैत के एयर बेस शामिल थे।
सुरक्षा खतरों को देखते हुए सऊदी अधिकारियों ने रियाद और अल-खरज इलाके के निवासियों के लिए हवाई खतरे की चेतावनी जारी की है। वहां के सरकारी दफ्तरों में अब रिमोट वर्क यानी घर से काम करने की व्यवस्था लागू कर दी गई है।
सऊदी सरकार ने अपने प्रमुख कार्यक्रम 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव' को भी स्थगित कर दिया है, जिसे 'डेजर्ट में दावोस' कहा जाता है। अक्टूबर 2026 के अंत में होने वाला यह आयोजन अब 2027 में होगा।
सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इसमें अमेरिकियों से सतर्क रहने और सऊदी सिविल डिफेंस के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। दूसरी ओर, मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के अधिकार पर मतदान 26 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया है।