ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के लिए कतर का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा

कतर का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं।

Gautam Sahu30 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के लिए कतर का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा

तेहरान: कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के वरिष्ठ सलाहकार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार सुबह, 30 अक्टूबर 2026 को तेहरान पहुंचा। यह दौरा ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की संभावनाओं और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए किया गया है।

खास बात यह है कि एक ही हफ्ते के भीतर कतर के मध्यस्थ दूसरी बार तेहरान पहुंचे हैं। यह पूरा राजनयिक मिशन वाशिंगटन के साथ करीबी समन्वय में चलाया जा रहा है।

इससे पहले पिछले रविवार को कतर के प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक पत्र ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई को सौंपा था। ईरानी अधिकारियों ने इस पत्र के लहजे को अधिक सम्मानजनक बताया है और इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है। हालांकि, रविवार को कतर द्वारा पेश किए गए शांति योजना के मसौदे को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने खारिज कर दिया। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि तेहरान अपने वर्तमान परमाणु रुख में कोई बदलाव नहीं करेगा।

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किसी भी संभावित समझौते के ढांचे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन चाहता है कि बातचीत की शुरुआत में ही परमाणु मुद्दों को सुलझाया जाए। वहीं, तेहरान का कहना है कि अमेरिका को पहले तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने होंगे और बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करनी होगी।

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को ईरानी संसद के स्पीकर ने जोर देकर कहा कि प्रगति ईरान की सात निर्धारित शर्तों के पूरा होने पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि 'गाजर और छड़ी' (पुरस्कार और दंड) वाला तरीका अब प्रभावी नहीं रहा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने बुधवार, 28 अक्टूबर को बताया कि देश मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए सात दिवसीय योजना को लागू करने वाले प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए मध्यस्थों के संपर्क में है। सूत्रों के अनुसार, अगले हफ्ते दोनों पक्षों के बीच एक फॉलो-अप बैठक हो सकती है, जिसके लिए दोहा या इस्तांबुल को संभावित स्थलों के रूप में देखा जा रहा है।

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