अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम करने के लिए कतर का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा तेहरान
अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक दूरी कम करने के लिए कतर का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा है। जानें क्या है शांति योजना और विवाद की वजह।

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिरोध को खत्म करने के लिए कतर का एक प्रतिनिधिमंडल 30 अक्टूबर, 2026 को तेहरान पहुंचा है। यह मिशन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ी खाई को पाटने के लिए शुरू किया गया है, जिसमें अमेरिका के साथ समन्वय किया गया है।
कूटनीतिक कोशिशें तब तेज हुईं जब कतर ने रविवार, 27 अक्टूबर, 2026 को शांति योजना का एक मसौदा पेश किया। इससे पहले 23 अक्टूबर को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने पुष्टि की थी कि तेहरान मध्य पूर्व युद्ध को समाप्त करने के लिए सात दिवसीय योजना के प्रस्तावों की समीक्षा करने हेतु मध्यस्थों के साथ करीबी संपर्क में है।
हालांकि, इस शांति प्रयास में चुनौतियां बरकरार हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कतर के मसौदे को खारिज करते हुए कहा कि इसमें "अस्वीकार्य विचार" शामिल हैं। अधिकारी ने यह भी साफ किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अपने वर्तमान रुख को बरकरार रखेगा।
अमेरिका की भूमिका को लेकर मिली-जुली खबरें सामने आई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 अक्टूबर को स्पष्ट किया था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा ईरानी नेतृत्व से संपर्क मुख्य रूप से चिकित्सा आपूर्ति से संबंधित था।
वहीं दूसरी ओर ऐसी खबरें हैं कि उपराष्ट्रपति वेंस ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में वेंस ने सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया और युद्ध खत्म करने पर चर्चा के लिए रजाई से मिलने की पेशकश की।
वेंस ने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, हालांकि उन्होंने ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और आर्थिक पुनर्निर्माण के हितों को भी स्वीकार किया। उन्होंने तेहरान से अनुरोध किया कि वह परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर बातचीत के लिए अधिकृत प्रतिनिधियों की नियुक्ति करे।
दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद मांगों के क्रम को लेकर है। वॉशिंगटन की जिद है कि किसी भी बातचीत की शुरुआत में परमाणु मुद्दों को सुलझाया जाना चाहिए। इसके विपरीत, तेहरान की मांग है कि अमेरिका पहले तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए और बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करे।
वर्तमान में कतर इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहा है, जबकि पाकिस्तान भी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक निकटता लाने में मदद कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि ये कोशिशें नाकाम रहती हैं, खासकर 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद, तो इजरायल की भागीदारी वाली सैन्य कार्रवाइयों का जोखिम बढ़ सकता है।