RAAG ने PoJK संकट पर जताई चिंता, पाक राजनयिक को तलब करने की मांग

जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहने वाले रिसर्च एंड एडवोकेसी ग्रुप (RAAG) ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। संगठन ने भारत सरकार से अपील की है कि वह नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्च आयोग के चार्ज डी'एफेयर को तुरंत तलब करे। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थानीय नागरिकों पर हो रहे अत्याचार, गिरफ्तारियों और मानवीय संकट के खिलाफ एक कड़ा राजनायिक विरोध दर्ज कराने की मांग की गई है।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को सौंपे गए एक विस्तृत ज्ञापन में RAAG ने भारत सरकार से औपचारिक रूप से डिमार्श जारी करने और एक 'नोट वर्बेल' के जरिए PoJK पर भारत की संप्रभुता को रेखांकित करने का आग्रह किया है। संगठन की ओर से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता एडवोकेट माधवी संब्याल ने इस बात पर जोर दिया कि PoJK के नागरिक कोई और नहीं बल्कि हमारे अपने लोग हैं, जो अवैध कब्जे के कारण नियंत्रण रेखा के पार रह रहे हैं।
संवैधानिक स्थिति और विधानसभा की चुप्पी पर सवाल
ज्ञापन में याद दिलाया गया कि भारत की संसद ने 22 फरवरी 1994 को एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि पाकिस्तान को अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्रों को खाली करना चाहिए। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 14(4) के तहत विधानसभा में 24 सीटें PoJK के लिए खाली छोड़ी गई हैं ताकि वहां के लोग अपने प्रतिनिधि चुन सकें।
हालांकि, RAAG ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने स्थानीय नागरिकों के इस गंभीर संकट पर अब तक कोई चर्चा नहीं की है। संगठन ने सवाल उठाया कि जहां एक तरफ विधानसभा में गाजा, फिलिस्तीन, ईरान और इजराइल जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है, वहीं नियंत्रण रेखा के पार अपने ही नागरिकों की पीड़ा पर पूरी तरह से चुप्पी साधना चिंता का विषय है।
संगठन का कहना है कि PoJK के लोगों की गुहार अनसुनी नहीं रहनी चाहिए और भारत के संस्थानों को उनकी रक्षा और मानवाधिकारों के लिए अपनी मुखर आवाज उठानी चाहिए।