Ra'am Party: राअम पार्टी की नई रणनीति से फिलिस्तीनी मुद्दा हुआ कमजोर, विश्लेषक ने दी बड़ी चेतावनी।

Nura Basta5 September 20262 min read32 viewsWorld
Ra'am Party: राअम पार्टी की नई रणनीति से फिलिस्तीनी मुद्दा हुआ कमजोर, विश्लेषक ने दी बड़ी चेतावनी।

राजनीतिक विश्लेषक और शोधकर्ता Ehab Jabareen ने अल जजीरा इंग्लिश में प्रकाशित अपने एक लेख में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि Ra'am पार्टी जिस तरह से इजरायली राजनीतिक दलों के साथ घुलने-मिलने की कोशिश कर रही है, उससे फिलिस्तीनी राष्ट्रीय मुद्दा मुख्य राजनीतिक एजेंडे से पीछे छूट रहा है। यह पूरी स्थिति आगामी 27 अक्टूबर 2026 के चुनाव से ठीक पहले पार्टी के एक बड़े और विवादित रणनीतिक बदलाव के बाद सामने आई है। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और आम लोगों के बीच भी इसकी काफी चर्चा हो रही है कि कैसे छोटे राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए बड़े मुद्दों को पीछे छोड़ रहे हैं।

Mansour Abbas का बड़ा फैसला और योव सेगालोविच की एंट्री

बीते 31 अगस्त 2026 को राअम पार्टी के नेता Mansour Abbas ने यह ऐलान किया था कि पूर्व येश अतिद सांसद और जायोनी नेता Yoav Segalovich पार्टी की चुनावी सूची में दूसरे स्थान पर रहेंगे। यह पार्टी का कोई आम गठबंधन नहीं है बल्कि एक तकनीकी समझौता है। इसके तहत योव सेगालोविच बिना औपचारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता लिए इसके संसदीय गुट में शामिल हो सकेंगे। इस समझौते के मुताबिक सेगालोविच को धर्म, राज्य, सुरक्षा और एलजीबीटीक्यू अधिकारों के मामलों पर पूरी स्वतंत्रता मिलेगी और वह खुद को एक जायोनी के रूप में ही पहचान देते रहेंगे। इस अजीबोगरीब गठबंधन को लेकर कई राजनीतिक दलों, खासकर लिकुड पार्टी ने चिंता जताई है कि इस समझौते का मुख्य मकसद किसी तरह फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को बढ़ावा देना है।

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चुनाव से पहले गठबंधन और फिलिस्तीनी राज्य पर रुख

यह राजनीतिक रणनीति काफी विवादों में घिरी हुई है क्योंकि 22 अगस्त 2026 को तैयबे शहर में एक सम्मेलन के दौरान मंसूर अब्बास ने खुले तौर पर इजराइल से एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की अपील की थी। उन्होंने इसे एक ऐसी वैश्विक सच्चाई बताया था जिसे केवल इजराइल और अमेरिका ही नकार रहे हैं। इस बयान के बाद इजरायली और विपक्षी दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और जमकर विरोध हुआ। इन सबके बाद ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं कि मंसूर अब्बास ने विपक्षी नेताओं को यह भरोसा दिलाया है कि भविष्य में जब भी गठबंधन को लेकर बातचीत होगी, तब इस मांग को आधिकारिक नीतिगत शर्त नहीं बनाया जाएगा।

वर्तमान समय में राअम पार्टी का पूरा ध्यान केवल नागरिक एकीकरण, अपराध को कम करने और इजराइल के अरब नागरिकों के लिए बजट आवंटन पर ही केंद्रित है। यह वही रास्ता है जिस पर चलकर इस पार्टी ने साल 2021 में इतिहास रचा था जब वह बेनेट-लापिड सरकार में शामिल हुई थी। राअम ऐसी पहली अरब पार्टी बनी थी जो किसी इजरायली शासी गठबंधन का हिस्सा बनी थी। विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी का यह जमीनी काम और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करना भले ही उन्हें तात्कालिक लाभ दे रहा हो, लेकिन इससे फिलिस्तीनी जनता की राष्ट्रीय आकांक्षाएं और बड़े राजनीतिक अधिकार हाशिए पर जा रहे हैं।

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